भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध वार्षिक रथयात्रा महोत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। सनातन परंपरा के अनुसार इस महोत्सव की शुरुआत देव स्नान यात्रा (स्नान पूर्णिमा) से होती है। इसके बाद भगवान जगन्नाथ भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा 15 दिनों तक अनवसर (एकांतवास) में रहेंगे।