नई दिल्ली: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। वर्ष 2026 के अगस्त माह में सावन का पवित्र महीना होने के कारण इस दौरान पड़ने वाले सोम प्रदोष और भौम प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है।

अगस्त 2026 में प्रदोष व्रत की तिथियां और शुभ मुहूर्त

पहला प्रदोष व्रत: सोम प्रदोष (10 अगस्त 2026)

सावन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर सोम प्रदोष व्रत रखा जाएगा।

  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 9 अगस्त 2026, रात 9:30 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 10 अगस्त 2026, शाम 6:24 बजे

सोम प्रदोष व्रत का महत्व

सोमवार को पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा, व्रत और अभिषेक करने से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।


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दूसरा प्रदोष व्रत: भौम प्रदोष (25 अगस्त 2026)

सावन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा।

  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 24 अगस्त 2026, रात 7:50 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 25 अगस्त 2026, रात 9:29 बजे

भौम प्रदोष व्रत का महत्व

मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी और मंगल ग्रह की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से मंगल दोष के अशुभ प्रभाव कम होते हैं, साहस और ऊर्जा में वृद्धि होती है तथा जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

प्रदोष व्रत में कैसे करें पूजा?

प्रदोष काल में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव का जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, चंदन और पुष्प से अभिषेक करें। इसके बाद शिव मंत्रों का जाप, शिव चालीसा या शिव स्तुति का पाठ करें तथा घी का दीपक जलाकर आरती करें। अंत में भगवान शिव और माता पार्वती से सुख, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करें।