पटना: लखीसराय के अशोक धाम में सोमवार को करंट फैलने की अफवाह के बाद मची भगदड़ ने एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में अफवाह और भीड़ प्रबंधन के सवाल खड़े कर दिए हैं। अशोक धाम स्टेशन और मंदिर के बीच बिजली का पोल गिरने के बाद करंट फैलने की अफवाह तेजी से फैली। प्रशासन के अनुसार पोल में करंट नहीं था, लेकिन अफवाह के कारण भगदड़ की स्थिति बन गई।

इस हादसे में 7 महिलाओं की मौत की सूचना सामने आई है, जबकि कई श्रद्धालु घायल हुए हैं। घटना सुबह करीब 6:30 से 7 बजे के बीच की बताई जा रही है।

2012 में पटना में भी हुआ था ऐसा हादसा

करंट की अफवाह के बाद भगदड़ की ऐसी ही घटना 2012 में पटना के अदालतगंज घाट पर छठ पूजा के दौरान सामने आई थी। उस हादसे में 17 लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु घायल हुए थे।

उस समय हादसे की वजह को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई थीं। कुछ लोगों ने रास्ते में बदलाव और पुल से जुड़ी स्थिति को भगदड़ की वजह बताया था, जबकि कुछ श्रद्धालुओं का कहना था कि बिजली का करंट फैलने की अफवाह के बाद लोग अचानक रास्ता बदलने लगे, जिससे भगदड़ मच गई।

अफवाह से बिगड़े हालात

पटना के उस हादसे के दौरान बिजली के तार से करंट लगने की चर्चा के बाद लोगों में अचानक अफरा-तफरी फैल गई थी। बताया गया कि बिजली विभाग ने इलाके की बिजली काट दी, जिसके बाद अंधेरा छा गया। भीड़ में मौजूद लोग तेजी से सुरक्षित स्थान की ओर जाने लगे और धक्का-मुक्की के बीच कई लोग गिर पड़े।

इस अफरातफरी में कई श्रद्धालु दब गए और गंभीर रूप से घायल हुए। बाद में घटना की परिस्थितियों और बिजली के तार से जुड़े पहलुओं की जांच भी कराई गई थी।

अशोक धाम हादसे ने फिर खड़ी की चुनौती

अशोक धाम की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान अफवाहों को रोकने, भीड़ को नियंत्रित करने और आपात स्थिति में निकासी व्यवस्था कितनी मजबूत होनी चाहिए।

लखीसराय प्रशासन के अनुसार, घटना के वक्त अचानक श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी और बैरिकेडिंग टूटने के बाद भगदड़ की स्थिति बनी। मामले की जांच के बाद घटना की पूरी वजह और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी