लखीसराय: प्रसिद्ध श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर (अशोक धाम) में सावन की सोमवारी के दौरान हुए दर्दनाक हादसे के बाद लखीसराय की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे में कई श्रद्धालुओं की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने के बाद सदर अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

आरोप है कि अशोक धाम में बनाए गए स्वास्थ्य शिविर में घटना के वक्त पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था मौजूद नहीं थी। वहीं, जब गंभीर रूप से घायल 22 श्रद्धालुओं को इलाज के लिए लखीसराय सदर अस्पताल लाया गया, तो वहां कथित तौर पर सिर्फ एक प्रशिक्षु चिकित्सक मौजूद था।

अशोक धाम के स्वास्थ्य शिविर में 14 डॉक्टरों की थी प्रतिनियुक्ति

सावन के दौरान अशोक धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष व्यवस्था किए जाने की बात कही गई थी। राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना के निर्देश पर दूसरे जिलों से 14 चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति की गई थी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके।

हालांकि, हादसे के बाद सामने आई स्थिति ने इन व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भगदड़ के बाद घायल श्रद्धालुओं को अशोक धाम स्थित स्वास्थ्य शिविर में अपेक्षित प्राथमिक उपचार नहीं मिल सका। आरोप है कि घटना के समय शिविर में ड्यूटी पर चिकित्सक मौजूद नहीं थे।

सदर अस्पताल में 22 घायलों की जिम्मेदारी एक प्रशिक्षु डॉक्टर पर

स्वास्थ्य शिविर से इलाज नहीं मिलने के बाद गंभीर रूप से घायल 22 लोगों को आनन-फानन में लखीसराय सदर अस्पताल पहुंचाया गया। यहां भी आपातकालीन स्थिति में पर्याप्त चिकित्सकीय व्यवस्था नहीं होने का आरोप लगा।

बताया गया कि उस समय अस्पताल में मात्र एक प्रशिक्षु चिकित्सक मौजूद था, जिसने बड़ी संख्या में पहुंचे घायलों का प्राथमिक उपचार किया। बाद में अन्य चिकित्सकों के अस्पताल पहुंचने की बात सामने आई।

इतनी बड़ी संख्या में घायलों के एक साथ अस्पताल पहुंचने के बावजूद पर्याप्त चिकित्सकों की मौजूदगी नहीं होने से अस्पताल में अफरातफरी की स्थिति पैदा हो गई। घटना के दौरान सिविल सर्जन की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी

अशोक धाम हादसे के बाद सदर अस्पताल की व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों और घायलों के परिजनों में नाराजगी देखने को मिली। लोगों ने आरोप लगाया कि गंभीर आपात स्थिति के लिए अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं थे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सदर अस्पताल की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पहले भी कई स्तरों पर प्रयास किए गए हैं, लेकिन आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। हादसे के बाद सामने आई स्थिति ने स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों और जवाबदेही पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

हादसे ने तैयारियों और जवाबदेही पर उठाए सवाल

अशोक धाम में सावन की सोमवारी को हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, एंबुलेंस और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इस हादसे के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि जब पहले से बड़ी भीड़ की संभावना थी और चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति की गई थी, तो घटना के समय स्वास्थ्य सेवाएं जमीन पर कितनी प्रभावी थीं। मामले में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।