AIIMS ने 38 अंगदान और देहदान करने वाले परिवारों को किया सम्मानित, कई मरीजों को मिला नया जीवन
नई दिल्ली : अपनों को खोने के
गहरे दुख के बीच मानवता की मिसाल पेश करने वाले परिवारों को सम्मानित करने के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई
दिल्ली के ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन (ORBO) ने शनिवार को एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया। इस दौरान 38
डोनर परिवारों को सम्मानित किया गया, जिनमें अंगदान, ऊतक (टिशू) दान और
देहदान करने वाले परिवार शामिल थे। सम्मानित परिवारों में ऐसे लोग शामिल थे
जिन्होंने अपने प्रियजनों के निधन के बाद उनके हृदय, फेफड़े, लिवर, किडनी, कॉर्निया, हार्ट
वॉल्व और अन्य ऊतकों का दान कर कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन देने में योगदान
दिया। कार्यक्रम में कई परिवारों ने अपने अनुभव भी साझा किए। दिल्ली निवासी घनश्याम कश्यप (37) की पत्नी
श्वेता ने बताया कि गंभीर
सिर की चोट के कारण उनके पति को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। 13
फरवरी को उनके निधन के बाद परिवार ने
उनके दोनों फेफड़े,
दोनों किडनी, लिवर
और हार्ट वॉल्व दान करने का निर्णय लिया। इस निर्णय से छह जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिला। कार्यक्रम में चार ऐसे पंजीकृत (Registered) दानकर्ताओं
के परिवारों को भी सम्मानित किया गया,
जिन्होंने मृत्यु के बाद अपना पूरा शरीर
चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए दान करने का संकल्प लिया था। एम्स के निदेशक डॉ. निखिल टंडन ने कहा कि हर वर्ष अंग और ऊतक दान के माध्यम से उन मरीजों को
नया जीवन मिलता है, जिनके अंग अंतिम चरण में काम करना बंद कर देते हैं। उन्होंने
समाज से अधिक से अधिक लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक होने की अपील की। ORBO की प्रभारी प्रो. आरती विज
ने बताया कि एम्स में मृत्यु की
प्रत्येक सूचना को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने और संभावित अंगदान की प्रक्रिया को
समय पर शुरू करने की व्यवस्था लागू की गई है,
ताकि अधिक से अधिक मरीजों को इसका लाभ
मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि अंगदान न
केवल कई लोगों की जान बचा सकता है,
बल्कि समाज में मानवता और सेवा की भावना
को भी मजबूत करता है।














