नई दिल्ली: देशभर में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल माफिया पर सख्ती के उद्देश्य से लाए गए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई है। शुक्रवार को जारी राजपत्र अधिसूचना के साथ यह संशोधन कानून लागू हो गया।

इससे पहले संसद के दोनों सदनों ने इस सप्ताह विधेयक को पारित किया था। नए कानून के तहत अब पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा।

पेपर लीक पर अब होगी कड़ी सजा

संशोधित कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक या अन्य अनुचित गतिविधियों में दोषी पाया जाता है तो उसे कठोर दंड का सामना करना पड़ेगा।

व्यक्तिगत अपराध के मामले में:

न्यूनतम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल।
अधिकतम 50 लाख रुपये तक का जुर्माना।

संगठित पेपर लीक गिरोह के मामलों में:

न्यूनतम 7 वर्ष तक का कारावास।
10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना।

सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा पेपर लीक माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाना है।

संसद से इस सप्ताह मिली थी मंजूरी

यह संशोधन विधेयक 29 जुलाई 2026 को लोकसभा और 30 जुलाई 2026 को राज्यसभा से पारित हुआ था। दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद इसे राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए भेजा गया था, जिसे अब स्वीकृति मिल गई है।

विपक्ष ने उठाए सवाल

विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल कड़ी सजा या फास्ट-ट्रैक अदालतों का प्रावधान करना पर्याप्त नहीं है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक की समस्या से निपटने के लिए परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की भी आवश्यकता है।