नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की सबसे बड़ी और चर्चित तिहाड़ जेल पर बढ़ते कैदियों के दबाव को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने नरेला में नई जेल बनाने की योजना तैयार की है और इसके लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) से 27 एकड़ जमीन आवंटित करने का प्रस्ताव भेजने का फैसला किया है।

दिल्ली सरकार में गृह मंत्री आशीष सूद ने बताया कि सरकार की दीर्घकालिक योजना तिहाड़ जेल परिसर को पूरी तरह शहर के बाहरी क्षेत्र में स्थानांतरित करने की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में तिहाड़ जेल घनी आबादी वाले इलाके में स्थित है, इसलिए इसे शहर से बाहर ले जाने से सुरक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी।

गृह मंत्री के अनुसार, जमीन आवंटित होने के बाद नई जेल परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। इसमें जेल की क्षमता, सुरक्षा व्यवस्था, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डिज़ाइन और अनुमानित लागत का विस्तृत खाका तैयार किया जाएगा।

दिल्ली के मौजूदा जेल तंत्र में तिहाड़, रोहिणी और मंडोली सहित कुल 16 जेलें हैं, जिनकी स्वीकृत क्षमता 10,026 कैदियों की है। हालांकि वर्तमान में इन जेलों में करीब 20,000 कैदी बंद हैं, जिससे क्षमता से कहीं अधिक दबाव बना हुआ है। सरकार का मानना है कि नई जेल बनने से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

प्रस्तावित नई जेल नरेला में पहले से निर्माणाधीन हाई-सिक्योरिटी जेल कॉम्प्लेक्स के समीप बनाई जाएगी। लगभग 40 एकड़ में बन रही हाई-सिक्योरिटी जेल विशेष रूप से 250 से 300 हाई-रिस्क कैदियों के लिए विकसित की जा रही है। इस परिसर में अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली, कड़े सुरक्षा प्रबंध और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

सरकार का कहना है कि भविष्य में तिहाड़ जेल को पूरी तरह स्थानांतरित करने के लिए अतिरिक्त भूमि और चरणबद्ध आधार पर बुनियादी ढांचे का विस्तार भी किया जाएगा।