अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। सबसे बड़ा झटका पेट्रोल और कच्चे तेल की कीमतों में देखने को मिल रहा है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें पिछले कुछ महीनों में 50 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन AAA के मुताबिक अमेरिका में रेगुलर गैसोलीन की औसत कीमत 4.48 डॉलर से बढ़कर 4.51 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है। फरवरी 2026 में ईरान संकट शुरू होने से पहले यही कीमत करीब 2.96 डॉलर प्रति गैलन थी। यानी कुछ ही महीनों में पेट्रोल 53 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ाने और कथित नाकेबंदी के कारण दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते ग्लोबल ऑयल मार्केट में भारी उथल पुथल मच गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई  जबकि WTI क्रूड भी तेजी के साथ 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव और बढ़ता है तो तेल की कीमतें आने वाले दिनों में और ऊपर जा सकती हैं। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने अमेरिकी परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई परिवार अपनी कमाई का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ ईंधन पर खर्च कर रहे हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि लगभग 44 प्रतिशत अमेरिकी लोगों ने ड्राइविंग कम कर दी है। कैलिफोर्निया में पेट्रोल की कीमत 6.17 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच चुकी है  जबकि वॉशिंगटन और हवाई जैसे राज्यों में भी कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति को लेकर अब अमेरिका में सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि ईरान के खिलाफ सख्त रणनीति और नौसैनिक घेराबंदी का असर अब खुद अमेरिकी जनता पर पड़ रहा है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने साफ किया है कि ईरान पर दबाव बनाने की नीति जारी रहेगी और होर्मुज क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां कम नहीं की जाएंगी। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत में अभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल तेल कीमतों में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और मुंबई में 103.54 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।