सरायकेला खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड अंतर्गत हेरमा पंचायत के ग्रामीणों में सरकार और प्रशासन के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। आजादी के 75 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद हेरमा समेत आसपास के कई गांव अब भी बुनियादी सुविधाओं और सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि ईचा-खरकई डैम परियोजना के तहत उनके गांवों को डूब क्षेत्र घोषित किया गया था। इसके बाद से क्षेत्र में विकास कार्य लगभग ठप पड़ गए। सड़क  आवास  पेयजल और अन्य आधारभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण वर्षों से कठिन जीवन जीने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इसी परियोजना के अंतर्गत आने वाले कई अन्य डूब क्षेत्र के गांवों में प्रधानमंत्री आवास योजना  सड़क निर्माण  हर घर नल-जल योजना समेत कई सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है  जबकि हेरमा पंचायत और आसपास के गांवों को इन योजनाओं से वंचित रखा गया है।

हेरमा गांव के ग्राम प्रधान दासकन कुदादा ने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से अपनी समस्याओं को प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष उठाते रहे हैं  लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उन्होंने बताया कि गांव के कई पात्र परिवार आज भी प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई तो वे बड़े जनआंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। इतना ही नहीं  उन्होंने वर्ष 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी भी दी है।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब एक ही परियोजना के अंतर्गत आने वाले अन्य डूब क्षेत्र के गांवों में विकास योजनाएं संचालित हो सकती हैं  तो हेरमा पंचायत को इससे वंचित क्यों रखा गया है। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन को इस भेदभावपूर्ण स्थिति पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

फिलहाल हेरमा और आसपास के गांवों के लोग अपने अधिकार  विकास और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सरकार और प्रशासन से न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है।