हजारीबाग के बड़ा अखाड़ा परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में महंत विजयानंद दास ने मंदिर मठ की जमीन से जुड़े विवाद और न्यायिक प्रक्रिया में कथित देरी को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने घोषणा की कि 15 जून सोमवार को दोपहर 12 बजे 181 वर्षों बाद भगवान की विग्रह मूर्ति को मंदिर से बाहर निकालकर समाहरणालय ले जाया जाएगा जहां न्याय की मांग को लेकर वरीय अधिकारियों से मुलाकात की जाएगी।महंत विजयानंद दास ने कहा कि वर्ष 2022 से वे न्यायालय समाहरणालय और अंचल कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला और केवल तारीख पर तारीख मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इचाक स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर मठ की जमीन के मामले में मृत व्यक्ति के नाम पर कथित रूप से जमाबंदी ऑनलाइन चढ़ाकर एलपीसी जारी किया गया और उसके आधार पर करोड़ों रुपये की भूमि का निबंधन किया गया।उन्होंने दावा किया कि सूचना के अधिकार आरटीआई के तहत प्राप्त दस्तावेजों में बिना सक्षम पदाधिकारी के हस्ताक्षर के जमाबंदी किए जाने का उल्लेख है। साथ ही उन्होंने कहा कि सीमांकन की प्रक्रिया तीन वर्षों से लंबित है और जांच रिपोर्ट भी एक वर्ष से अधिक समय से नहीं आई है, जबकि इस दौरान संबंधित भूमि की खरीद बिक्री जारी रही।महंत ने यह भी आरोप लगाया कि पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने के बावजूद कथित तौर पर जमीन माफियाओं और दलालों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। उन्होंने कहा कि न्याय की मांग करते-करते वे थक चुके हैं और अब भगवान की विग्रह मूर्ति के साथ समाहरणालय जाकर अपनी बात रखेंगे।महंत विजयानंद दास के अनुसार जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा तब तक मंदिर से बाहर निकाली गई भगवान की विग्रह मूर्ति पुनः मंदिर में स्थापित नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके बजाय जनजागरण के उद्देश्य से भगवान की प्रतिमा को विभिन्न स्थानों पर ले जाया जाएगा।प्रेस वार्ता में राजकुमार यादव ब्रजेश तिवारी अवध बिहारी दास उमेश पांडे आनंद पांडे मनोज पांडे धनंजय पांडे सत्यम पांडे निशांत पांडे सहित कई लोग उपस्थित रहे।