नई दिल्ली: ओमान की खाड़ी में भारत की ओर आ रहे एक एलएनजी (LNG) कार्गो जहाज पर ड्रोन हमला होने की खबर सामने आई है। हमले में जहाज के इंजन रूम में आग लग गई, हालांकि चालक दल की सतर्कता के कारण बड़ा हादसा टल गया। जहाज पर सवार सभी 29 क्रू सदस्य, जिनमें चार भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, LNGC AL REKAYYAT नामक यह जहाज कतर के रास लाफान बंदरगाह से एलएनजी लेकर गुजरात के दहेज बंदरगाह की ओर आ रहा था। 7 जुलाई को जब जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समीप ओमान की खाड़ी से गुजर रहा था, तभी उस पर ड्रोन से हमला किया गया।

हमले में ड्रोन ने जहाज के सबसे संवेदनशील हिस्से, यानी इंजन रूम को निशाना बनाया। विस्फोट के बाद इंजन रूम में आग लग गई और वहां से धुएं का गुबार उठने लगा। हालांकि चालक दल ने तत्काल राहत एवं सुरक्षा उपाय अपनाते हुए आग पर काबू पा लिया, जिससे किसी तरह की जनहानि या समुद्र में गैस रिसाव जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।

सभी 29 क्रू सदस्य सुरक्षित

जहाज पर कुल 29 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें चार भारतीय भी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक सभी क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। शुरुआती आकलन में जहाज को कुछ तकनीकी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है, लेकिन इसके बावजूद जहाज अपनी यात्रा जारी रखते हुए भारत के दहेज बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है।

क्रू की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

ड्रोन हमले के बाद जहाज को रोकने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश नाकाम रही। चालक दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आग पर नियंत्रण पाया और जहाज को सुरक्षित दिशा में आगे बढ़ाया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आग समय पर नहीं बुझाई जाती, तो स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी।

24 घंटे में तीसरा हमला

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों के भीतर इस समुद्री मार्ग पर वाणिज्यिक जहाजों पर यह तीसरा बड़ा हमला है। लगातार हो रहे ऐसे हमलों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

कतर ने ईरान पर लगाया आरोप

घटना के बाद कतर ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. माजिद अल अंसारी ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास कतर के जहाज को निशाना बनाया जाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और नौवहन की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया।

कतर ने ईरान से ऐसी गतिविधियों को तत्काल रोकने की मांग करते हुए कहा कि इस हमले और उससे होने वाले संभावित नुकसान के लिए ईरान कानूनी रूप से जिम्मेदार होगा।

इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है तथा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर कई देशों की चिंताएं भी गहरा गई हैं।