कर्क संक्रांति पर बाबा बैद्यनाथ धाम में सजी अनोखी बिल्वपत्र प्रदर्शनी, श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब
देवघर: कर्क संक्रांति के
अवसर पर विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में गुरुवार को 155 वर्ष पुरानी परंपरा के तहत भगवान
भोलेनाथ को दुर्लभ पहाड़ी बिल्वपत्र अर्पित किए गए। शाम सात बजे विभिन्न बिल्वपत्र
दलों ने विधि-विधान से बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना कर बिल्वपत्र चढ़ाया। वहीं
शाम के समय आकर्षक और दुर्लभ बिल्वपत्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी
भीड़ उमड़ पड़ी। परंपरा के अनुसार शाम करीब पांच बजे
विभिन्न दल चांदी के थालों में सजे बिल्वपत्र लेकर ढोल-नगाड़ों के साथ शहर भ्रमण
करते हुए मंदिर पहुंचे। इसके बाद अपने-अपने निर्धारित स्थानों पर चांदी, तांबा और स्टील के पात्रों में
बिल्वपत्रों को आकर्षक ढंग से सजाकर प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर जनरल
समाज, देव कृपा वन सम्राट बिल्वपत्र समाज,
बरनेल
समाज, मसानी दल, राजाराम
बिल्वपत्र समाज तथा पंडित
मनोकामना राधेश्याम बेलपत्र समाज सहित विभिन्न दलों ने अपनी-अपनी अनूठी
प्रदर्शनी लगाई। प्रदर्शनी में बाबा के त्रिनेत्र के समान आकार वाले दुर्लभ पहाड़ी
बिल्वपत्र श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने रहे। आयोजकों ने बताया कि इन विशेष
बिल्वपत्रों को जंगलों और पहाड़ों से खोजकर लाने में कई दिनों की मेहनत लगती है।
प्रदर्शनी के बाद इन्हीं बिल्वपत्रों को भगवान बैद्यनाथ पर अर्पित किया जाता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ देशभर
से आए कांवरियों और श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक बिल्वपत्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
कई श्रद्धालु दुर्लभ बिल्वपत्रों को देखकर आश्चर्यचकित नजर आए। बताया जाता है कि इस अनूठी परंपरा की
शुरुआत बम-बम बाबा ब्रह्मचारी ने की थी, जो आज देवघर की धार्मिक और सांस्कृतिक
पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।














