नई दिल्ली: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक लगातार 20वें दिन भी आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है और बताया जा रहा है कि उनका वजन करीब 9 किलोग्राम तक कम हो चुका है।
'20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा'
अनशन के दौरान सोनम वांगचुक ने कहा,
"मैं किसी भी कीमत पर 20 जुलाई तक जीवित रहूंगा ताकि आप सबके साथ संसद तक मार्च कर सकूं। अगर 20 जुलाई को हमारा मार्च सफल नहीं हुआ, तो मैं भूत बनकर लौट आऊंगा।"
उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। समर्थकों ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपना हास्यबोध नहीं खोया है और युवाओं से संसद मार्च में शामिल होने की अपील की है।
सेहत को लेकर बढ़ी चिंता
वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। बताया जा रहा है कि उनका वजन तेजी से घटा है और डॉक्टर नियमित रूप से उनकी जांच कर रहे हैं।
पिनारयी विजयन ने केंद्र पर साधा निशाना
केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने केंद्र सरकार पर वांगचुक की बिगड़ती सेहत के प्रति उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को वांगचुक द्वारा उठाए गए मुद्दों पर संवाद करना चाहिए और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को गंभीरता से लेना चाहिए।
मांगों पर अब भी नहीं हुई बातचीत
वांगचुक 28 जून से आंदोलन में शामिल हैं और तब से लगातार आमरण अनशन पर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग शामिल है। फिलहाल उनकी मांगों पर सरकार की ओर से किसी औपचारिक बातचीत की जानकारी सामने नहीं आई है।














