नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा के 7 अगस्त से शुरू होने वाले मॉनसून सत्र में राजधानी के विकास, प्रशासनिक सुधार और नागरिक सुविधाओं से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे। इन विधेयकों का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक जवाबदेह बनाना, झुग्गीवासियों को राहत देना और बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) योजना में सुधार करना है। इसके अलावा विधानसभा में दो सीएजी रिपोर्ट भी पेश की जाएंगी।

1. बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) योजना होगी समाप्त

दिल्ली सरकार वर्ष 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान शुरू की गई बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) योजना को समाप्त करने जा रही है। सरकार का कहना है कि इस योजना में कई खामियां सामने आई हैं। मालवीय नगर स्थित एक लाइसेंसधारी B&B होटल में आग लगने से 23 लोगों की मौत के बाद इसकी समीक्षा की गई थी। फिलहाल राजधानी में इस योजना के तहत करीब 750 लाइसेंस जारी हैं। सरकार भविष्य में नई और अधिक सुरक्षित नीति लाने पर विचार कर रही है।

2. 2025 तक बनी झुग्गियों का होगा पुनर्वास

सरकार 'दिल्ली स्लम एवं झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति-2026' के तहत नया विधेयक लाएगी। इसके अनुसार 1 जनवरी 2025 तक बनी सभी झुग्गियों में रहने वाले परिवारों को बहुमंजिला आवासीय फ्लैटों में बसाया जाएगा।

इस योजना से करीब 4 लाख परिवारों को लाभ मिलने का अनुमान है। वर्तमान में पुनर्वास की कट-ऑफ तारीख 1 जनवरी 2015 है, जिसे बढ़ाकर 1 जनवरी 2025 करने का प्रस्ताव है। नीति के तहत PPP मॉडल पर बहुमंजिला आवास बनाए जाएंगे तथा खाली भूमि का व्यावसायिक उपयोग भी किया जाएगा। विधेयक पारित होने के बाद 45 दिनों के भीतर पुनर्वास की टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।

3. तय समय पर सरकारी सेवा नहीं मिली तो अधिकारी पर जुर्माना

सरकार 'दिल्ली राइट टू टाइम-बाउंड डिलीवरी ऑफ सर्विसेज बिल-2026' भी पेश करेगी। इसके तहत नागरिकों को तय समय सीमा में सरकारी सेवाएं प्राप्त करने का कानूनी अधिकार मिलेगा।

यदि कोई अधिकारी निर्धारित समय में सेवा उपलब्ध नहीं कराता है तो उस पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। यह नया कानून वर्ष 2011 के मौजूदा अधिनियम का स्थान लेगा और सरकारी जवाबदेही को मजबूत करेगा।

उद्योगों के लिए भी आएगा नया कानून

दिल्ली सरकार 'दिल्ली ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस बिल-2026' पर भी काम कर रही है। इसके तहत उद्योगों और कारोबारियों को लाइसेंस, एनओसी, बिजली, पानी और सीवर जैसी सभी आवश्यक मंजूरियां सिंगल विंडो ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी।

साथ ही कम जोखिम वाले उद्योगों के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन की व्यवस्था लागू होगी, जिससे ऐसे उद्योगों को पंजीकरण के बाद सामान्य परिस्थितियों में तीन वर्ष तक नियमित निरीक्षण से राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे निवेश बढ़ेगा, कारोबार करना आसान होगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।