नई दिल्ली: भारत की पूर्व विदेश मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता सुषमा स्वराज की सातवीं पुण्यतिथि पर उनकी बेटी एवं भाजपा सांसद बंसुरी स्वराज ने भावुक संदेश साझा कर अपनी मां को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि समय आगे बढ़ता रहता है, लेकिन कुछ खालीपन जीवनभर नहीं भरते।

बंसुरी स्वराज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा, "मां सुषमा स्वराज। समय आगे बढ़ता रहता है, लेकिन कुछ खालीपन कभी नहीं भरते। आपकी यादें, आपकी शिक्षाएं और आपने मुझमें जो मूल्य स्थापित किए हैं, वे हर कदम पर मेरा मार्गदर्शन करते हैं। आपकी सातवीं पुण्यतिथि पर आपको मेरी सादर श्रद्धांजलि। ओम शांति।"

भारतीय राजनीति की प्रभावशाली नेता थीं सुषमा स्वराज

14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला में जन्मी सुषमा स्वराज ने पंजाब विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। वर्ष 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर हरियाणा विधानसभा पहुंचीं और उस समय राज्य की सबसे युवा कैबिनेट मंत्रियों में शामिल रहीं।

भाजपा में लंबा और सफल राजनीतिक सफर

सुषमा स्वराज ने 1984 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामा। इसके बाद उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में प्रतिनिधित्व किया तथा सूचना एवं प्रसारण, स्वास्थ्य, संसदीय कार्य जैसे कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।

दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री

वर्ष 1998 में सुषमा स्वराज दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। हालांकि उनका कार्यकाल संक्षिप्त रहा, लेकिन उन्होंने अपनी कार्यशैली और नेतृत्व से अलग पहचान बनाई। बाद में वे 2009 से 2014 तक लोकसभा में विपक्ष की नेता भी रहीं।

विदेश मंत्री के रूप में बनाई अलग पहचान

2014 से 2019 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में विदेश मंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्रालय को आम लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाया। सोशल मीडिया के माध्यम से विदेशों में फंसे भारतीयों की त्वरित सहायता कर उन्होंने जनसेवा का नया उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी संवेदनशील कार्यशैली और त्वरित निर्णय क्षमता की देश-विदेश में व्यापक सराहना हुई।

जनसेवा के प्रति समर्पित रहीं

स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद सुषमा स्वराज जनसेवा के प्रति समर्पित रहीं। उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा और उसी वर्ष 6 अगस्त को हृदयाघात के कारण उनका निधन हो गया।

राष्ट्र के प्रति उनके असाधारण योगदान को सम्मान देते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया। आज भी उनकी सादगी, संवेदनशीलता और जनसेवा की भावना देशवासियों के लिए प्रेरणा बनी हुई है।