लखनऊ कोचिंग सेंटर हादसा: सुप्रीम कोर्ट सख्त, एलडीए उपाध्यक्ष को अवमानना नोटिस; एसआईटी रिपोर्ट भी तलब
नई दिल्ली: लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए दर्दनाक हादसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष को अवमानना नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। यह मामला जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और मास्टर प्लान के उल्लंघन से जुड़े मामलों में पूर्व आदेशों के अनुपालन की समीक्षा कर रही थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय के एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि जिस इमारत में हादसा हुआ, उसके खिलाफ 10 मई 2016 को ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। लेकिन 5 जुलाई 2016 को एलडीए ने तकनीकी आधार पर अपना ही आदेश वापस ले लिया और उसके बाद भवन के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके बावजूद आवासीय भवन का उपयोग लगातार व्यावसायिक और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए होता रहा। बाद में इसी भवन में हुए हादसे में 15 छात्रों की मौत हो गई। हादसे के बाद प्रशासन ने भवन को ध्वस्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला शहरी नियोजन नियमों के पालन और सार्वजनिक अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अदालत ने टिप्पणी की कि मास्टर प्लान का खुलेआम उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे गंभीर परिणाम सामने आए। सुप्रीम कोर्ट ने एलडीए के उपाध्यक्ष को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अदालत ने उनसे यह स्पष्ट करने को कहा है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। अदालत ने हादसे के बाद गठित विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट भी अगली सुनवाई में सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में भूमि उपयोग नियमों, भवन कानूनों और शहरी नियोजन के प्रभावी अनुपालन से जुड़ा हुआ है। अदालत ने संकेत दिया कि सभी राज्यों की राजधानियों में ऐसे नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।2016 में गिराने का आदेश, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने जताई गंभीर चिंता
एलडीए उपाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से होना होगा पेश
एसआईटी रिपोर्ट भी मांगी
पूरे देश के लिए अहम टिप्पणी















