नई दिल्ली: मोदी सरकार 12 अगस्त 2026 को फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन (अमेंडमेंट) यानी FCRA संशोधन विधेयक संसद में पेश कर सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह खुद लोकसभा में इस बिल को पेश कर सकते हैं। संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलना प्रस्तावित है, ऐसे में सरकार की प्राथमिकता इस विधेयक को इसी सत्र में आगे बढ़ाने की बताई जा रही है।

FCRA संशोधन विधेयक मार्च 2025 से संसद में लंबित बताया जा रहा है। प्रस्तावित बदलावों को लेकर राजनीतिक दलों और कुछ संगठनों के बीच पहले से ही मतभेद हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि विधेयक देशहित में जरूरी है और इससे जुड़े विभिन्न पक्षों की चिंताओं पर विचार किया जाएगा।

परिसीमन पर भी सरकार की नजर

FCRA बिल के साथ-साथ परिसीमन को लेकर भी केंद्र सरकार की रणनीति चर्चा में है। परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव संविधान संशोधन से संबंधित है, जिसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है।

रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 में सरकार द्वारा परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लाने का प्रयास किया गया था, जिसमें लोकसभा की अधिकतम सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव बताया गया था। इसमें 2011 की जनगणना को आधार बनाने और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की मौजूदा सीटों में कम से कम 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान होने की बात सामने आई थी।

2027 की जनगणना के बाद बदल सकता है समीकरण

संविधान के अनुच्छेद 81 और 82 के तहत अगले परिसीमन को लेकर 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आंकड़ों को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में 2027 की जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर संवैधानिक रास्ता खुल सकता है।

परिसीमन का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके साथ लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की संभावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। सरकार की रणनीति में दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर करना भी अहम माना जा रहा है।

दक्षिणी राज्यों को साधने की कोशिश

परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की प्रमुख चिंता यह रही है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व में नुकसान हो सकता है। इसी वजह से केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को मौजूदा सीटों में बढ़ोतरी की गारंटी देने की रणनीति पर चर्चा हो रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक सरकार दक्षिणी राज्यों के सामने यह विकल्प रख सकती है कि वे संविधान संशोधन का समर्थन करके सीटों में प्रस्तावित बढ़ोतरी की गारंटी स्वीकार करें या फिर भविष्य में जनगणना के आंकड़ों के आधार पर होने वाले परिसीमन का इंतजार करें।

यदि इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनती है तो आने वाले महीनों में परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए विशेष सत्र बुलाने की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है। फिलहाल FCRA संशोधन विधेयक और परिसीमन दोनों ही केंद्र सरकार के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दे बने हुए हैं।