रांची:  JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ पिछले 17 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों का विधानसभा मार्च सोमवार को तनावपूर्ण हो गया। अपनी मांगों को लेकर विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से पहले बैरिकेडिंग की गई, फिर लाठीचार्ज किया गया और इसके बाद वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े।

छात्रों का आरोप है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन उन्हें रोकने के लिए लगातार बल प्रयोग किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लाठीचार्ज के बाद वाटर कैनन और अब आंसू गैस का इस्तेमाल इस बात का संकेत है कि प्रशासन किसी भी कीमत पर छात्रों को विधानसभा से दूर रखना चाहता है।

पहले बैरिकेडिंग, फिर लाठीचार्ज

सोमवार सुबह हजारों छात्र विधानसभा घेराव के लिए निकले। प्रशासन ने रास्ते में कई स्तरों पर बैरिकेडिंग और कंटीले तार लगाए थे। छात्रों ने जब आगे बढ़ने की कोशिश की तो कई जगह बैरिकेडिंग पार कर दी गई।

इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए लाठीचार्ज किया। कार्रवाई के दौरान कई छात्रों के घायल होने की सूचना सामने आई।

वाटर कैनन से भी नहीं माने छात्र

लाठीचार्ज के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद पुलिस ने छात्रों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पानी की तेज बौछारों के बीच भी छात्र मौके पर डटे रहे और लगातार नारेबाजी करते रहे।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पानी की बौछार से उनकी आवाज नहीं दबाई जा सकती और वे अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे।

अब आंसू गैस का इस्तेमाल

वाटर कैनन के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े। एएनआई द्वारा जारी वीडियो में प्रदर्शन स्थल पर आंसू गैस के इस्तेमाल और पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति दिखाई दे रही है।

एक के बाद एक कार्रवाई को लेकर छात्र संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार को छात्रों की मांगों पर बातचीत करनी चाहिए, न कि लाठी, पानी और आंसू गैस के जरिए आंदोलन को खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए।

‘मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे’

आंदोलनकारी छात्र JSSC-CGL समेत विवादित परीक्षाओं को रद्द करने, JPSC-JSSC मामले की स्वतंत्र CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।

छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार की ओर से कुछ मांगों पर कार्रवाई का दावा किया गया है, लेकिन उनकी प्रमुख मांगों पर अभी तक स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ है। यही वजह है कि आंदोलन जारी है।

विधानसभा मार्च में शामिल हुए देवेंद्र नाथ महतो

कई दिनों से अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी विधानसभा मार्च में शामिल हुए। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद उनके आंदोलन में पहुंचने से छात्रों में उत्साह देखा गया।

आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल परीक्षा रद्द कराने की लड़ाई नहीं है, बल्कि झारखंड के युवाओं के भविष्य और भर्ती व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की लड़ाई है।

अब आगे क्या?

लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद छात्र आंदोलन और सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है। एक तरफ प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रहा है, वहीं छात्र संगठनों का आरोप है कि बल प्रयोग के जरिए उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार छात्रों से बातचीत के जरिए समाधान निकालेगी या बल प्रयोग के बाद आंदोलन और व्यापक रूप लेगा? फिलहाल छात्र अपनी मांगों पर अड़े हैं और विधानसभा मार्च के बाद झारखंड की सियासत भी गरमा गई है।