कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव हो गया है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने साफ कहा कि पार्टी हाईकमान के निर्देश पर उन्होंने यह फैसला लिया है. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह राज्यसभा नहीं जाएंगे और कर्नाटक में विधायक के रूप में सक्रिय राजनीति जारी रखेंगे.

सिद्धारमैया ने कहा दो दिन पहले ही हाईकमान ने इस्तीफा देने को कहा था  इसलिए मैंने आज अपना इस्तीफा दे दिया.  उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अब डीके शिवकुमार राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे.

संविधान हमारा धर्म है

इस्तीफे के बाद सिद्धारमैया ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद अगला नेता चुनना पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया है और राज्यपाल को बहुमत वाले नेता को सरकार बनाने का मौका देना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के पास पर्याप्त बहुमत है और सरकार पूरी तरह स्थिर रहेगी.

उन्होंने कहा संविधान हमारा धर्म है और हम उसी पर विश्वास करते हैं.

राज्यसभा का ऑफर भी ठुकराया

सिद्धारमैया ने बताया कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा भेजने का सुझाव दिया था  लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि उनकी दिलचस्पी राष्ट्रीय राजनीति में नहीं है और वह कर्नाटक की जनता के बीच रहकर काम करना चाहते हैं.

7 करोड़ कन्नडिगा मेरे भगवान

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिद्धारमैया भावुक भी नजर आए. उन्होंने कहा कि एक साधारण गांव से निकलकर दो बार मुख्यमंत्री बनना उनके लिए बड़ी बात है.

उन्होंने कहा  7 करोड़ कन्नडिगा ही मेरे भगवान हैं. जनता ने मुझे जो प्यार और भरोसा दिया उसके लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगा.

सिद्धारमैया ने कांग्रेस नेतृत्व सोनिया गांधी  राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे  का भी धन्यवाद किया.

राजनीतिक सफर को किया याद

उन्होंने अपने 50 साल के राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि उनके परिवार में कोई राजनीति में नहीं था. वह संयोग से राजनीति में आए और जनता के समर्थन से विधायक मंत्री विपक्ष के नेता और फिर दो बार मुख्यमंत्री बने.

सिद्धारमैया ने कहा कि वह हमेशा बसवन्ना  महात्मा गांधी  बाबा साहेब आंबेडकर और गौतम बुद्ध की विचारधारा से प्रेरित रहे हैं और सामाजिक न्याय के लिए काम करते रहेंगे.

गारंटी योजनाओं का भी किया जिक्र

अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि उनकी सरकार ने चुनावी वादों को पूरा करने का काम किया. उन्होंने दावा किया कि 2013-2018 के दौरान किए गए 160 वादों में से 158 पूरे किए गए थे. वहीं 2023 के बाद घोषित पांच गारंटी योजनाओं को पहले ही साल में लागू कर दिया गया.