पलामू: तरहसी अंचल से जमीन विवाद का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्व व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला एक ही जमीन पर दो लोगों की दावेदारी और दोनों के नाम से ऑनलाइन लगान रसीद कटने का है। जमीन के स्वामित्व को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं और एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

सवाल यह है कि आखिर एक ही जमीन की लगान रसीद दो अलग-अलग लोगों के नाम से कैसे कट रही है और जमीन का वास्तविक मालिक कौन है?

मामला तरहसी थाना क्षेत्र के नौगढ़ पंचायत अंतर्गत नावा गांव का है।

शांति देवी ने लगाया जबरन कब्जे का आरोप

नावा गांव निवासी शांति देवी, पति सरयू भुइयां ने तरहसी अंचल कार्यालय में आवेदन देकर आरोप लगाया है कि उनकी रैयती जमीन पर गांव के ही परमेश्वर साव ने कथित तौर पर जबरन कब्जा कर लिया है।

शांति देवी के अनुसार, खाता संख्या-1 के प्लॉट संख्या 800 और 853 में करीब 1 एकड़ 94 डिसमिल जमीन उनके परिवार की है। उनका आरोप है कि जब वे जमीन पर खेती-बाड़ी करने जाती हैं, तो उन्हें कथित तौर पर धमकाकर और गाली-गलौज कर वहां से भगा दिया जाता है।

शांति देवी की बहू आशा देवी का कहना है कि संबंधित जमीन का ऑनलाइन लगान आज भी उनके परिवार के नाम से कट रहा है। ऐसे में दूसरे पक्ष द्वारा जमीन पर कब्जे और उसके नाम से भी लगान रसीद कटने की बात से परिवार परेशान है।

शांति देवी का कहना है, “जमीन हमारी है, रसीद भी कट रही है। इसके बावजूद दूसरे पक्ष द्वारा जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर न्याय की मांग है।”

दूसरे पक्ष ने बताया जमीन खरीदने का दावा

वहीं, दूसरे पक्ष के परमेश्वर साव ने शांति देवी के परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों को गलत बताया है। उनका दावा है कि उन्होंने वर्ष 2022 में मनातू के जगदीश्वरजीत सिंह के वंशज से उक्त जमीन खरीदी थी।

परमेश्वर साव के अनुसार, जमीन का म्यूटेशन उनके नाम पर हुआ है और इसी आधार पर उनके नाम से भी लगान रसीद कट रही है।


एक जमीन, दो रसीद... सवालों के घेरे में राजस्व व्यवस्था

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जमीन एक ही है, तो आखिर दो अलग-अलग व्यक्तियों के नाम से ऑनलाइन लगान रसीद कैसे कट रही है?

क्या राजस्व अभिलेखों में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है? क्या दोनों पक्षों के दस्तावेजों की अलग-अलग तरीके से जांच हुई है? और यदि दोनों के नाम से रसीद जारी हुई है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?

ग्रामीणों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए खतियान, रजिस्टर-2, दाखिल-खारिज, लगान रसीद, बिक्री दस्तावेज और अन्य राजस्व अभिलेखों की गहन जांच जरूरी है। दस्तावेजों की जांच और राजस्व रिकॉर्ड के मिलान के बाद ही जमीन के वास्तविक स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

अंचलाधिकारी बोले- जांच के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति

मामले में तरहसी के अंचलाधिकारी हरिश्चंद्र मुंडा ने कहा कि पूरे मामले की जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। उन्होंने फिलहाल इस मामले पर टिप्पणी करना उचित नहीं बताया और कहा कि पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी।

फिलहाल एक ही जमीन पर दो दावेदार सामने हैं और दोनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर अधिकार का दावा कर रहे हैं। अब सबकी नजर राजस्व विभाग की जांच पर है कि दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच के बाद जमीन का वास्तविक स्वामित्व किसके पक्ष में सामने आता है और इस विवाद का स्थायी समाधान कैसे निकलता है।