एनसीएसटी आशा लकड़ा रांची विश्वविद्यालय समीक्षा आदिवासी छात्र प्रमोशन
रांची। राष्ट्रीय अनुसूचित
जनजाति आयोग (NCST) की
सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने बुधवार को रांची विश्वविद्यालय और डॉ.
श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में अध्ययनरत अनुसूचित जनजाति (एसटी)
विद्यार्थियों, शिक्षकों
एवं कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं की समीक्षा की। आयोग ने दोनों
विश्वविद्यालयों के अधिकारियों को सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने
का निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट के आधार पर आयोग राज्य सरकार, विश्वविद्यालयों तथा विश्वविद्यालय
अनुदान आयोग (UGC) को
अपनी अनुशंसाएं भेजेगा। समीक्षा
के दौरान डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि दोनों विश्वविद्यालयों के पास नियुक्ति, पदोन्नति, वेतन निर्धारण (पे फिक्सेशन) और
छात्रवृत्ति जैसे कई मामलों में स्वतंत्र निर्णय लेने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं
है तथा अधिकांश निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि
विश्वविद्यालयों में पदोन्नति की स्पष्ट व्यवस्था विकसित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने
बताया कि जनजातीय विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए जेपीएससी
के माध्यम से परीक्षा
आयोजित की गई थी, लेकिन
उसका परिणाम अब तक घोषित नहीं हुआ है। इसके कारण संबंधित विभागों में शिक्षकों की
कमी बनी हुई है। डॉ.
लकड़ा ने यह भी कहा कि रांची विश्वविद्यालय के 38 कॉलेजों में से केवल 21 में ही स्नातकोत्तर (PG) की पढ़ाई संचालित हो रही है। उन्होंने
क्लस्टर सिस्टम में खड़िया और संताली भाषा को एक साथ शामिल किए जाने पर चिंता
व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था लागू करने से पहले संबंधित हितधारकों से
व्यापक चर्चा होनी चाहिए थी। उन्होंने
बताया कि जनजातीय भाषा विभागों से हर वर्ष कई विद्यार्थी JRF
के लिए चयनित होते हैं, लेकिन पर्याप्त शोध-निर्देशक (Guide)
उपलब्ध नहीं होने के कारण वे पीएचडी
पूरी नहीं कर पाते। इससे भविष्य में जनजातीय विषयों के योग्य शिक्षकों की उपलब्धता
भी प्रभावित हो सकती है। बैठक
में प्रोफेसरों और कर्मचारियों की लंबित पदोन्नति, पे-फिक्सेशन, अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त कर्मचारियों
की सेवा संबंधी समस्याओं तथा विश्वविद्यालय स्तर पर रोस्टर प्रणाली लागू करने जैसे
मुद्दों पर भी चर्चा हुई। आयोग
ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिया कि अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के
हितों की रक्षा के लिए इंटरनल ग्रीवांस रिड्रेसल सेल का गठन किया जाए और
प्रत्येक तीन महीने में उसकी नियमित बैठक आयोजित की जाए। साथ ही विश्वविद्यालय
स्तर पर लायज़न ऑफिसर की नियुक्ति कर उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण
देने का भी निर्देश दिया गया। इसके
अलावा आयोग ने सुझाव दिया कि छात्रवृत्ति योजना के तहत केवल पीजी टॉपर्स ही नहीं,
बल्कि यूजी और पीजी दोनों स्तरों के जनजातीय
मेधावी विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति का लाभ दिया जाए। डॉ.
आशा लकड़ा ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप
विश्वविद्यालयों को अधिक प्रशासनिक अधिकार दिए जाएं, ताकि अनुसूचित जनजाति के छात्रों,
शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े
मामलों का समाधान विश्वविद्यालय स्तर पर ही प्रभावी ढंग से किया जा सके।














