हजारीबाग शेख भिखारी अस्पताल बेसहारा मरीज विशेष वार्ड मांग
हजारीबाग। समाज की संवेदनशीलता
और मानवीय जिम्मेदारी की मिसाल पेश करते हुए हजारीबाग की सामाजिक संस्था हेल्पिंग
इंडिया ट्रस्ट ने शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल
(SBMCCH) में अनाथ, लावारिस और बेसहारा मरीजों के लिए अलग समर्पित
विशेष वार्ड बनाने की मांग तेज कर दी है। संस्था का
कहना है कि ऐसे मरीजों को इलाज के साथ-साथ देखभाल और मानवीय सहारा भी मिलना चाहिए। इस
पहल के पीछे एक मार्मिक घटना है, जिसने
पूरे शहर को सोचने पर मजबूर कर दिया। कुछ समय पहले अस्पताल में एक अज्ञात वृद्ध
गंभीर बीमारी की हालत में लावारिस अवस्था में पड़े मिले थे। उनका हालचाल पूछने
वाला कोई नहीं था। इलाज, भोजन
और देखभाल के अभाव में उनकी स्थिति लगातार बिगड़ रही थी। इसी दौरान हेल्पिंग
इंडिया ट्रस्ट के सदस्यों ने उनकी जिम्मेदारी उठाई। संस्था ने अस्पताल प्रबंधन से
समन्वय कर उनके बेहतर इलाज की व्यवस्था कराई और लगातार उनकी देखभाल की। आज
वही वृद्ध पहले से काफी स्वस्थ हैं। उन्हें नियमित दवा, भोजन और आवश्यक चिकित्सा सुविधा मिल रही
है। ट्रस्ट के सदस्य समय-समय पर अस्पताल जाकर उनका हालचाल लेते हैं। संस्था का
मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति की मदद नहीं, बल्कि संवेदनशील समाज की जीत का उदाहरण
है। हेल्पिंग
इंडिया ट्रस्ट का कहना है कि अस्पताल में ऐसे कई अनाथ और लावारिस मरीज आते हैं,
जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं होता।
वर्तमान व्यवस्था में उन्हें सामान्य वार्ड में भर्ती किया जाता है, जहां अन्य मरीजों के परिजनों की तरह
उनकी देखभाल करने वाला कोई मौजूद नहीं रहता। कई बार दवा, भोजन, साफ-सफाई और नियमित निगरानी के अभाव में
उनकी स्थिति और गंभीर हो जाती है। इसी
को देखते हुए संस्था ने जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि अस्पताल
में एक अलग 'विशेष बेसहारा वार्ड' बनाया जाए, जहां ऐसे मरीजों को निःशुल्क उपचार,
नियमित देखभाल, भोजन और आवश्यक मानवीय सहयोग उपलब्ध
कराया जा सके। संस्था ने यह भी सुझाव दिया है कि वार्ड में प्रशिक्षित पैरामेडिकल
स्टाफ या स्वयंसेवकों की व्यवस्था हो, ताकि मरीजों को परिवार जैसा सहयोग मिल सके। हेल्पिंग
इंडिया ट्रस्ट ने शहरवासियों और सामाजिक संगठनों से भी इस अभियान में सहयोग की
अपील की है। संस्था का कहना है कि किसी भी सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है
कि वह अपने सबसे कमजोर और असहाय लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है। यदि किसी व्यक्ति
का इस दुनिया में कोई नहीं है, तो
बीमारी के समय समाज और व्यवस्था को उसका सहारा बनना चाहिए। अब
निगाहें जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन पर टिकी हैं कि इस मानवीय पहल पर कब
सकारात्मक निर्णय लिया जाता है और बेसहारा मरीजों के लिए समर्पित वार्ड की दिशा
में ठोस कदम उठाए जाते हैं।














