हजारीबाग: जिला निबंधन कार्यालय में भूमि निबंधन की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भारतीय नागरिक अधिकार रक्षामंच ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत विस्तृत जानकारी मांगी है। मंच ने मुख्यमंत्री झारखंड सरकार, भू-निबंधन मंत्री, मुख्य सचिव, भू-राजस्व सचिव, उपायुक्त हजारीबाग, अपर समाहर्ता और जिला अवर निबंधक पदाधिकारी को आवेदन भेजकर भूमि निबंधन से जुड़े नियम, आदेश और वर्तमान प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है।

रजिस्ट्री प्रक्रिया और राजस्व को लेकर सवाल

मंच का दावा है कि हजारीबाग निबंधन कार्यालय में भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया प्रभावित होने से सरकार को मिलने वाले राजस्व पर भी असर पड़ रहा है। RTI के जरिए यह जानने की मांग की गई है कि वर्तमान में भूमि निबंधन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज अनिवार्य हैं और किन परिस्थितियों में किसी दस्तावेज को स्वीकार, अस्वीकार, अमान्य या लंबित किया जा सकता है।

खतियान के आधार पर रजिस्ट्री को लेकर मांगा नियम

RTI आवेदन में झारखंड सरकार द्वारा भूमि निबंधन प्रक्रिया को लेकर जारी दिशा-निर्देशों की प्रमाणित प्रति मांगी गई है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या केवल भूमि खतियान के आधार पर निबंधन किया जा सकता है या इसके लिए अन्य दस्तावेज भी जरूरी हैं।

मंच ने LPC (भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र), रजिस्टर-टू, भू-लगान, पारिवारिक संयुक्त राजीनामा, बंटवारा संबंधी दस्तावेज तथा मुखिया/जनप्रतिनिधि और अंचल अधिकारी के सत्यापन से जुड़े शपथ पत्र की अनिवार्यता के नियमों की भी जानकारी मांगी है।

प्रभारी पदाधिकारी की कार्रवाई का ब्योरा मांगा

RTI में वर्तमान प्रभारी पदाधिकारी प्रेम कुमार के स्तर से भूमि निबंधन के लिए प्राप्त दस्तावेजों पर की गई कार्रवाई का विवरण भी मांगा गया है। इसमें स्वीकार, रद्द, अमान्य और लंबित किए गए दस्तावेजों की संख्या के साथ संबंधित कार्रवाई के लिए लागू नियमों की जानकारी शामिल है।

लोक सेवा गारंटी कानून पर भी सवाल

मंच ने झारखंड लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2011 के तहत जिला अवर निबंधन कार्यालय में सेवाओं के लागू होने की स्थिति की जानकारी मांगी है।

यदि यह अधिनियम लागू है, तो लंबित भूमि निबंधन मामलों में निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं करने पर संबंधित पदाधिकारी के खिलाफ अब तक की गई दंडात्मक कार्रवाई का विवरण भी मांगा गया है।

LPC की अनिवार्यता पर स्पष्ट जवाब की मांग

RTI में विशेष रूप से पूछा गया है कि हजारीबाग जिले में भूमि निबंधन के लिए LPC अनिवार्य है या नहीं। इसके अलावा अन्य जिलों में LPC के बिना भूमि निबंधन की व्यवस्था है या नहीं, इस संबंध में झारखंड सरकार के नियम और आदेश की प्रमाणित प्रति मांगी गई है।

मंच ने यह भी पूछा है कि ऑनलाइन दाखिल-खारिज होने और झारभूमि पोर्टल पर ऑनलाइन जमाबंदी पंजी-2 में रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बाद क्या इन ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर भूमि का निबंधन किया जा सकता है।

अंचल अधिकारियों की रिपोर्ट पर भी मांगी जानकारी

RTI में कहा गया है कि हजारीबाग के सभी अंचल अधिकारियों द्वारा जिला अवर निबंधक कार्यालय को LPC उपलब्ध नहीं कराया जाता और उसकी जगह भूमि जांच प्रतिवेदन भेजा जाता है। ऐसे में उस जांच प्रतिवेदन के आधार पर भूमि निबंधन को वैध मानने संबंधी नियम की जानकारी मांगी गई है।

इसके साथ ही अंचल अधिकारियों द्वारा जिला अवर निबंधक कार्यालय को ई-मेल के माध्यम से LPC भेजे जाने और इसकी संख्या से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद LPC की स्थिति पर सवाल

मंच ने झारखंड हाईकोर्ट के LPC से संबंधित निबंधन व्यवस्था पर दिए गए आदेश का हवाला देते हुए पूछा है कि यदि न्यायालय द्वारा LPC को लेकर जारी अधिसूचना रद्द की गई है, तो वर्तमान में LPC की अनिवार्यता किस आदेश के आधार पर लागू है।

इसके अलावा प्रतिबंधित भूमि से संबंधित अधिसूचना और न्यायालय के आदेश के संदर्भ में गैरमजरूआ खास खाता या प्रतिबंधित श्रेणी की ऐसी भूमि, जिस पर आम भू-रैयत का दावा है, उसके निबंधन की वर्तमान कानूनी स्थिति की जानकारी भी मांगी गई है।

पावरनामा और बंटवारानामा पर भी जानकारी

RTI में यह भी पूछा गया है कि जिन जमीनों पर खतियान या डीड के आधार पर जमाबंदी कायम है, उन जमीनों के पावरनामा, बंटवारानामा, हुकुमनामा और खुश्की केवाला आदि दस्तावेजों के आधार पर भूमि निबंधन करने का प्रावधान है या नहीं।

इसके लिए संबंधित अधिनियम, नियमावली, विभागीय आदेश और दिशा-निर्देशों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई हैं।

जनहित में मांगी गई जानकारी

भारतीय नागरिक अधिकार रक्षामंच का कहना है कि भूमि निबंधन की प्रक्रिया स्पष्ट और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और सरकार के राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

मंच ने RTI के जरिए मांगी गई सूचनाओं को जनहित से जुड़ा बताते हुए संबंधित विभागों से भूमि निबंधन के नियमों और वर्तमान व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है।