पूर्णिया:  बेहतर नौकरी और अच्छे भविष्य की उम्मीद में दुबई पहुंचे बिहार के पूर्णिया जिले के अमौर विधानसभा क्षेत्र के सात युवक कथित तौर पर मुश्किलों में फंस गए हैं। युवकों ने एक एजेंट पर विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लेने, नौकरी नहीं दिलाने और पासपोर्ट अपने कब्जे में रखने का आरोप लगाया है। पीड़ित युवकों ने वीडियो जारी कर भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।

मोजा फैक्टरी में नौकरी का दिया था भरोसा

पीड़ित युवकों के अनुसार, एजेंट नाहिद गनी ने उन्हें दुबई में मोजा फैक्टरी में अच्छी नौकरी और बेहतर वेतन दिलाने का भरोसा दिया था। इसी भरोसे पर युवकों ने अपनी जमा पूंजी लगाकर एजेंट को करीब डेढ़-डेढ़ लाख रुपये दिए और दुबई पहुंचे।

युवकों का आरोप है कि दुबई पहुंचने के बाद उन्हें हकीकत का पता चला। वहां न तो वादे के मुताबिक नौकरी मिली और न ही रहने-खाने की उचित व्यवस्था हो सकी। धीरे-धीरे उनके पास मौजूद पैसे भी खत्म होने लगे, जिसके बाद उनके सामने खाने-पीने तक का संकट खड़ा हो गया।

पासपोर्ट रखने का आरोप, वापसी में भी परेशानी

पीड़ितों ने आरोप लगाया कि दुबई पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट एजेंट की ओर से अपने कब्जे में ले लिए गए। पासपोर्ट नहीं होने के कारण वे भारत वापस लौटने में भी असमर्थ हैं। युवकों ने वीडियो कॉल के जरिए अपनी स्थिति बताते हुए मदद की अपील की है।

पीड़ितों में दिलफरोज आलम, नासिर आलम, रब्बान खान, दानिश, नाजिश और शमशाद समेत एक अन्य युवक शामिल हैं। सभी के अमौर क्षेत्र का रहने वाला होने की बात कही जा रही है।

वीडियो वायरल कर लगाई मदद की गुहार

युवकों ने अपनी स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने पूर्व विधायक मुजाहिद आलम से भी मदद की अपील की। युवकों का आरोप है कि वीडियो सामने आने के बाद एजेंट की ओर से उन्हें धमकाया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पूर्व विधायक ने दिया मदद का भरोसा

पूर्व विधायक मुजाहिद आलम ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि वह संबंधित अधिकारियों से संपर्क करेंगे और युवकों की सुरक्षित भारत वापसी के लिए प्रयास किया जाएगा। उन्होंने विदेश में नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी के मामलों पर चिंता जताते हुए ऐसे एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत बताई।

प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

सात युवकों के दुबई में फंसे होने की खबर के बाद उनके परिजनों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। लोगों ने प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर युवकों को सुरक्षित वापस लाने की मांग की है।

फिलहाल पूरे मामले में युवकों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच जरूरी है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कथित एजेंट के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है।