बड़कागांव विस्थापित आंदोलन थालियां शंखनाद जमीन संघर्ष
हजारीबाग
बड़कागांव प्रखंड के बादम और गोंदलपूरा पंचायत में विस्थापित ग्रामीणों का विरोध
लगातार तेज होता जा रहा है। अपनी जमीन और अस्तित्व की रक्षा के लिए ग्रामीणों ने
एक अनोखा और भावनात्मक आंदोलन शुरू किया है जिसमें हर रात ठीक 8 बजे थालियां बजाई जाती हैं
और शंखनाद किया जाता है। ग्रामीणों का
कहना है कि यह आंदोलन केवल शोर नहीं, बल्कि अपनी माटी जल जंगल और जमीन
को बचाने की सामूहिक पुकार है। जैसे ही रात 8 बजे का समय होता है पूरे गांव में
माताएं थालियां बजाने लगती हैं बुजुर्ग ढोलक और शंख से आवाज उठाते हैं जबकि युवा टॉर्च और मोबाइल फ्लैशलाइट जलाकर अपनी मौजूदगी
दर्ज कराते हैं। स्थानीय लोगों
के अनुसार यह क्रम लगभग 15
मिनट तक चलता है और इसका उद्देश्य प्रशासन व सिस्टम तक अपनी
आवाज पहुंचाना है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि औद्योगिक परियोजनाओं के कारण
उनकी पुश्तैनी जमीन जंगल और जलस्रोत खतरे में हैं जिससे उनका जीवन और भविष्य
प्रभावित हो रहा है। विस्थापितों ने
साफ कहा है कि वे किसी भी स्थिति में अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं और अपने
अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखेंगे।














