धनबाद के  कतरास जिले मे के तिलाटांड़ क्षेत्र में कथित रूप से जाली दस्तावेज के आधार पर रैयती जमीन की खरीद-बिक्री का मामला सामने आने के बाद विवाद गहरा गया है। रविवार को दोनों पक्षों ने अलग-अलग पत्रकार वार्ता कर अपने-अपने पक्ष रखे और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की।

पहले पक्ष की ओर से स्वर्गीय गोपाल सिंह के परिजनों ने आरोप लगाया कि उनकी पुश्तैनी रैयती जमीन जो पूर्वज गोपेश्वर राय के नाम दर्ज है उसके दस्तावेजों में हेराफेरी कर अवैध तरीके से बिक्री कर दी गई है। परिवार के सदस्य मुकेश सिंह ने बताया कि वर्ष 1970 में धनबाद निबंधन कार्यालय में आग लगने के कारण कई मूल अभिलेख नष्ट हो गए थे जिसका फायदा उठाकर कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।

परिवार का आरोप है कि हरि मोहन सिंह समेत अन्य लोगों ने इस कथित साजिश में भूमिका निभाई है। इस संबंध में धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर सोनिया देवी राहुल कुमार और हरि मोहन सिंह के खिलाफ जांच एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

परिवार की सदस्य कमला देवी ने भी आरोप लगाया कि उनकी जमीन के कागजात में छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने कहा कि उनके पास जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज मौजूद हैं और उन्हें प्रशासन से निष्पक्ष जांच की उम्मीद है।

वहीं दूसरे पक्ष की ओर से हरि मोहन सिंह और राहुल सिंह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें बदनाम करने की नीयत से झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।

राहुल सिंह ने दावा किया कि विवादित जमीन उन्होंने स्वर्गीय फिरंगी मिस्त्री की पत्नी सोनिया देवी से विधिवत खरीदी है तथा पूरी खरीद-बिक्री कानूनी प्रक्रिया के तहत संपन्न हुई है। उन्होंने कहा कि उनके पास सभी आवश्यक एवं वैध दस्तावेज मौजूद हैं जो उनकी खरीद को सही साबित करते हैं।

दोनों पक्षों ने पत्रकारों के समक्ष अपने-अपने दस्तावेज प्रस्तुत किए और कहा कि यदि किसी पक्ष को आपत्ति है तो प्रशासनिक अथवा न्यायिक स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जा सकती है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसे स्वीकार किया जाएगा।

फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है और किसी भी पक्ष के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।