सांप के काटने पर झाड़ फूंक में गई महिला की जान चार बच्चे हुए अनाथ
कैमूर बिहार के कैमूर जिले में अंधविश्वास की
एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। सर्पदंश के बाद समय पर अस्पताल ले जाने के बजाय
एक महिला को झाड़-फूंक के लिए धार्मिक स्थल ले जाया गया। कई घंटे बीतने के बाद जब
उसकी हालत गंभीर हो गई तब
परिजन उसे भभुआ सदर अस्पताल लेकर पहुंचे जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। यह मामला भभुआ
थाना क्षेत्र के मनिहारी गांव का है। जानकारी के अनुसार, अनिता देवी अपने घर में शाम के
समय रोटी बना रही थीं। इसी दौरान उन्हें सांप ने डस लिया। सर्पदंश के तुरंत बाद
परिजन उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के बजाय चैनपुर के निमिया स्थित सती माई धाम ले गए, जहां कई घंटों तक झाड़-फूंक कराई गई। जब महिला की तबीयत
लगातार बिगड़ने लगी, तब
परिजन उन्हें भभुआ सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी और डॉक्टरों
ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतका अपने पीछे चार
छोटे बच्चों को छोड़ गई हैं। बताया गया कि दो वर्ष पहले ही उनके पति का निधन हो
चुका था। पति की मौत के बाद अनिता देवी अपने मायके में रह रही थीं और बच्चों का
पालन-पोषण कर रही थीं। अब उनकी मौत के बाद चारों बच्चे माता-पिता दोनों के साये से
वंचित हो गए हैं। मृतका के पिता धनंजय
लोहार ने बताया कि उनकी बेटी को घर में खाना बनाते समय सांप ने काट
लिया था। इसके बाद उसे झाड़-फूंक के लिए निमिया स्थित सती माई धाम ले जाया गया।
वहां से हालत बिगड़ने पर अस्पताल लाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर
दिया। ग्रामीण मंगरु
बिंद ने बताया कि महिला की मौत सर्पदंश के कारण हुई है। उन्होंने
जिला प्रशासन से आपदा राहत के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता परिवार को उपलब्ध
कराने की मांग की ताकि
अनाथ हुए चार बच्चों के पालन पोषण में मदद मिल सके। गौरतलब है कि बिहार
सरकार और स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर लोगों से अपील करते रहे हैं कि सर्पदंश की
स्थिति में झाड़-फूंक या अंधविश्वास का सहारा लेने के बजाय तुरंत निकटतम सरकारी
अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर चिकित्सकीय उपचार मिलने से
अधिकांश सर्पदंश पीड़ितों की जान बचाई जा सकती है।चार बच्चों के सिर से
उठा मां का साया
पिता ने बताई पूरी
घटना
ग्रामीणों ने की
मुआवजे की मांग
समय पर इलाज ही बचा
सकता है जान















