तेजस्वी यादव ने RJD की सभी संगठन इकाइयां भंग कीं, क्या अफवाहों ने बढ़ाई चिंता
पटना: बिहार की सियासत में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव के एक बड़े फैसले ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। तेजस्वी यादव ने पार्टी की विभिन्न स्तरों पर गठित संगठन इकाइयों को भंग कर दिया है। इस फैसले को जहां बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इसके पीछे संगठन को नए सिरे से तैयार करने की रणनीति भी बताई जा रही है। राजद से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि तेजस्वी यादव के खिलाफ पिछले कुछ समय से दो तरह की राजनीतिक अफवाहें तेजी से फैलाई जा रही थीं। पहली अफवाह यह थी कि तेजस्वी यादव का केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ कोई गुप्त राजनीतिक समझौता हो गया है और वह सत्ता परिवर्तन की लड़ाई के बजाय केवल विपक्ष में बने रहने की राजनीति कर रहे हैं। दूसरी चर्चा यह थी कि तेजस्वी यादव भारत छोड़कर यूरोप जाने और वहां की नागरिकता लेने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, इन दावों की कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषण में इन चर्चाओं को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के परिणाम से भी जोड़ा जा रहा है। माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर ने खुद को सरकार विरोधी राजनीति के एक विकल्प के तौर पर पेश किया और इसका असर राजद के पारंपरिक समर्थन आधार पर भी पड़ा। राजद के सामने अब चुनौती अपनी पार्टी की पहचान और संगठनात्मक पकड़ को मजबूत बनाए रखने की है। खासतौर पर भाजपा को प्रभावी चुनौती देने वाली प्रमुख विपक्षी पार्टी के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत करना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजद सूत्रों के मुताबिक पार्टी संगठन को नए सिरे से तैयार करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पुराने और अनुभवी कार्यकर्ताओं को सम्मान देने के साथ-साथ नए चेहरों को भी संगठन में जिम्मेदारी देना बताया जा रहा है। चर्चा है कि जिला और प्रखंड स्तर के कई अध्यक्षों को बदला जा सकता है। हालांकि, हटाए जाने वाले पदाधिकारियों को पार्टी में दूसरी जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना भी बताई जा रही है। इसके बाद प्रदेश स्तर पर भी संगठन का नया ढांचा तैयार किए जाने की चर्चा है। पार्टी की कोशिश संगठन को अधिक सक्रिय और चुनावी चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने की है। बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बीच तेजस्वी यादव के सामने संगठन को मजबूत करने की चुनौती बढ़ गई है। पार्टी नेतृत्व अब पुराने कार्यकर्ताओं और नए चेहरों के बीच बेहतर संतुलन बनाने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, संगठन इकाइयों को भंग करने के फैसले की आधिकारिक वजह पार्टी नेतृत्व की ओर से विस्तार से सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में नए संगठनात्मक ढांचे और उसमें शामिल होने वाले चेहरों पर सभी की नजर रहेगी।अफवाहों को लेकर चिंतित होने की चर्चा
बांकीपुर उपचुनाव से जोड़ा जा रहा असर
संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी
तेजस्वी के सामने संगठन मजबूत करने की चुनौती















