JPSC-JSSC विवाद: मंत्री इरफान अंसारी का शर्मनाक बयान झारखंड में पेपर लीक नहीं हुआ
रांची: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर पिछले 13 दिनों से सैकड़ों छात्र खुले आसमान के नीचे आंदोलन कर रहे हैं। धूप, बारिश, भूख और अनिश्चितता के बीच बैठे इन युवाओं की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि सरकार उनकी बात सुनेगी और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का पारदर्शी जवाब देगी। ऐसे समय में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का यह बयान कि "झारखंड में कोई पेपर लीक नहीं हुआ है" नई बहस को जन्म देता है। सवाल यह नहीं है कि अंतिम निष्कर्ष क्या होगा, बल्कि यह है कि जब जांच अभी जारी है और छात्र लगातार अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, तब इस तरह का स्पष्ट बयान क्या आंदोलनरत युवाओं की भावनाओं को आहत नहीं करता? सरकार की ओर से पहले ही यह स्वीकार किया जा चुका है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की जांच CID कर रही है। जांच के दौरान कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं। पूर्व JPSC अध्यक्ष ने भी अपने पद से इस्तीफा दिया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं छात्रों से बातचीत के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात कर चुके हैं। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि यदि सब कुछ पूरी तरह सामान्य था, तो जांच, कार्रवाई और संवाद की जरूरत क्यों पड़ी? मंत्री इरफान अंसारी ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात का भी उल्लेख किया। लेकिन झारखंड के आंदोलनरत छात्रों के लिए दूसरे राज्यों की तुलना शायद सबसे बड़ा मुद्दा नहीं है। उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल अपने भविष्य, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच का है। लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन केवल राजनीतिक गतिविधि नहीं, बल्कि नागरिकों की आवाज भी होता है। पिछले 13 दिनों से सड़क पर बैठे छात्र किसी राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि अपने करियर और भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में सरकार के प्रत्येक बयान से यह अपेक्षा की जाती है कि वह भरोसा बढ़ाए, न कि नए सवाल खड़े करे। अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकार पर है। यदि उसे भरोसा है कि जांच निष्पक्ष होगी, तो उसे छात्रों के सामने तथ्यों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। संवाद, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई ही इस विवाद का सबसे प्रभावी समाधान हो सकती है। क्योंकि यह मामला केवल JPSC या JSSC का नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के विश्वास और उनके भविष्य का है।















