ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आयात की तैयारी में भारत, पीएम मोदी के दौरे में ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर रहेगा फोकस
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच होने वाली बैठक में यूरेनियम आपूर्ति के अलावा रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और नई तकनीकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार वाले देशों में शामिल है। वैश्विक यूरेनियम भंडार का करीब एक-चौथाई हिस्सा ऑस्ट्रेलिया में मौजूद है। भारत अपनी बढ़ती परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए स्थायी ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आयात होने पर भारत अपनी घरेलू यूरेनियम क्षमता का उपयोग अन्य रणनीतिक जरूरतों के लिए बेहतर तरीके से कर सकेगा। भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। भविष्य में बनने वाले डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-टेक उद्योगों के लिए भी परमाणु ऊर्जा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खनन क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, वैश्विक यूरेनियम आपूर्ति श्रृंखला में चीन की मजबूत मौजूदगी है। चीन की सरकारी कंपनियों की नामीबिया, नाइजर और कजाखस्तान जैसे देशों की यूरेनियम परियोजनाओं में बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में भारत अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और किसी एक देश पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से ऑस्ट्रेलिया के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का ऑस्ट्रेलिया दौरा केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों क्वाड (Quad) समूह के सदस्य हैं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त एवं सुरक्षित समुद्री मार्गों के पक्षधर हैं। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा क्षेत्रीय परिस्थितियों, समुद्री सुरक्षा और बदलते भू-राजनीतिक माहौल को देखते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग और मजबूत किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में कई नई पहल पर भी सहमति बन सकती है। इनमें— बैठक में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), बैटरी निर्माण और अन्य आधुनिक तकनीकों के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा साइबर सुरक्षा और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के बीच PACTS ढांचे के तहत नई पहल की संभावना जताई जा रही है।नई दिल्ली/कैनबरा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौतों में ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आयात सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह समझौता भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यूरेनियम समझौता?
चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी होगी मजबूत
रक्षा सहयोग को मिलेगा नया आयाम
क्रिटिकल मिनरल्स और नई तकनीकों पर भी होगा सहयोग















