काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र ‘बालेन’ शाह ने सोमवार को भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात की। यह मुलाकात सिंह दरबार स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय और मंत्रिपरिषद के कार्यालय में हुई। बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के करीब चार महीने बाद किसी विदेशी राजनयिक के साथ यह पहली अलग से आमने-सामने द्विपक्षीय बैठक मानी जा रही है।

इस मुलाकात की खास बात यह रही कि बालेन शाह ने सोमवार को होने वाली अपनी अलग-अलग राजनयिक बैठकों की शुरुआत भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के साथ की। इसके बाद उनकी चीनी राजदूत झांग माओमिंग के साथ भी अलग से बैठक प्रस्तावित थी। मंगलवार को अमेरिकी दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स स्कॉट अर्बोम के साथ उनकी मुलाकात होनी है।

बैठक के दौरान नेपाल-भारत संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने आपसी दोस्ती, साझा हित, विकास साझेदारी और दोनों देशों के बीच जारी सहयोग को आगे बढ़ाने पर बातचीत की।

भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री शाह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारत-नेपाल के बीच मजबूत और बहुआयामी साझेदारी को और गहरा करने को लेकर सार्थक बातचीत होने की बात कही।

पहली बार आमने-सामने द्विपक्षीय बातचीत

बालेन शाह ने इससे पहले विदेशी राजदूतों के साथ व्यक्तिगत मुलाकातों से दूरी बनाए रखी थी और समूह स्तर पर बातचीत को प्राथमिकता दी थी। अब भारतीय और चीनी राजदूतों के साथ अलग-अलग बैठकें उनके कूटनीतिक रुख में बदलाव का संकेत दे रही हैं।

भारतीय राजदूत से पहले मुलाकात को लेकर कूटनीतिक हलकों में चर्चा इसलिए भी है क्योंकि भारत और चीन दोनों नेपाल के महत्वपूर्ण पड़ोसी और रणनीतिक साझेदार हैं। हालांकि, केवल बैठक के क्रम को नेपाल की विदेश नीति में किसी एक देश को प्राथमिकता देने का निर्णायक प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। नेपाल दोनों पड़ोसी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश करता रहा है।

भारत-चीन के बीच संतुलन की कोशिश

बालेन शाह के सोमवार के कार्यक्रम में भारत और चीन दोनों के राजदूतों के साथ आमने-सामने बातचीत शामिल थी। ऐसे में भारतीय राजदूत के साथ पहली बैठक के बाद चीनी राजदूत से बातचीत को नेपाल की संतुलित कूटनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।

भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध हैं। वहीं चीन भी नेपाल के लिए महत्वपूर्ण विकास और रणनीतिक साझेदार है। ऐसे में बालेन शाह सरकार के सामने दोनों पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को संतुलित रखने की चुनौती बनी हुई है।

फिलहाल बालेन शाह की भारतीय राजदूत से मुलाकात को नेपाल की विदेश नीति में प्रत्यक्ष संवाद की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में भारत, चीन और अमेरिका के प्रतिनिधियों के साथ उनकी बातचीत से उनकी सरकार की कूटनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर और संकेत मिल सकते हैं।