यमुना बाजार 310 परिवार बेदखली नोटिस दिल्ली कांग्रेस विरोध
राजधानी दिल्ली के
यमुना बाजार इलाके में रहने वाले करीब 310 परिवारों पर बेघर
होने का खतरा मंडरा रहा है। दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण DDMA और MCD की ओर से जारी बेदखली नोटिस के बाद इलाके में डर चिंता और सियासी हलचल
तेज हो गई है। नोटिस में परिवारों को 15 दिनों के भीतर इलाका
खाली करने को कहा गया है वरना अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। दिल्ली प्रदेश
कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने यमुना बाजार पहुंचकर प्रभावित
परिवारों से मुलाकात की और उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने बीजेपी
सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि NGT के आदेश का सहारा
लेकर गरीब परिवारों को उजाड़ने की कोशिश की जा रही है। देवेंद्र यादव ने कहा कि ये परिवार पीढ़ियों से यमुना किनारे
रह रहे हैं और उनकी रोजी रोटी घाटों से जुड़ी हुई है। यहां रहने वाले कई परिवार
निगमबोध घाट पर अंतिम संस्कार यमुना आरती और धार्मिक कर्मकांड का काम करते हैं। कांग्रेस ने
साफ कहा कि जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे पर अदालत से लेकर सड़क तक लड़ाई लड़ी जाएगी। दूसरी ओर स्थानीय लोगों का कहना है कि उनका परिवार 100 से 200 सालों से यहां रह रहा
है। कुछ लोगों ने दावा किया कि उनके पूर्वज मुगल काल और अकबर के समय से इस इलाके
से जुड़े रहे हैं। निवासियों का कहना है कि उन्हें अचानक अतिक्रमणकारी बताकर हटाया
जा रहा है जबकि दशकों तक प्रशासन की ओर से कभी ऐसी कार्रवाई नहीं की गई। स्थानीय परिवारों का कहना है कि अगर उन्हें यहां से हटाया गया
तो उनके सामने रोजगार बच्चों की पढ़ाई और रहने का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। लोगों ने
सरकार से सवाल किया कि पुनर्वास की स्पष्ट योजना बताए बिना उन्हें 15 दिन में कहां जाने के लिए कहा जा रहा है। सरकार का तर्क है कि यमुना बाजार दिल्ली का सबसे निचला इलाका
है और बाढ़ के दौरान सबसे पहले यही क्षेत्र प्रभावित होता है। वहीं स्थानीय लोगों
का कहना है कि पहले भी कई बार बाढ़ आई
लेकिन तब उन्हें स्थायी रूप से नहीं
हटाया गया था। यमुना बाजार का मुद्दा अब सिर्फ
अतिक्रमण या पुनर्वास का नहीं बल्कि विरासत पहचान और आजीविका से जुड़ी लड़ाई बनता जा रहा है।














