रांची:  झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को उस वक्त तनावपूर्ण हो गया, जब विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़ रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इससे पहले प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस की ओर से वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया।

छात्रों की ओर से दावा किया गया कि वे शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया। घटना के बाद पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

घायल छात्र ने लगाए लाठीचार्ज के आरोप

घटना में घायल बताए जा रहे छात्र विक्रम कुमार ने एएनआई से बातचीत में आरोप लगाया कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे और किसी तरह की अभद्रता नहीं की जा रही थी। उनके मुताबिक, अचानक पुलिस की ओर से लाठीचार्ज शुरू कर दिया गया।

छात्र ने कहा कि सरकार को आंदोलन कर रहे युवाओं के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपने भविष्य और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर अपनी आवाज उठा रहे हैं।

बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर बोला हमला

पुलिस कार्रवाई पर झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला।

मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “झारखंड के छात्रों पर बरस रही हर लाठी झामुमो-कांग्रेस सरकार के ताबूत की कील साबित होगी।”

उन्होंने छात्र आंदोलन के समर्थन में अपनी बात रखते हुए सरकार से युवाओं की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। मरांडी पहले भी JPSC और JSSC से जुड़े मामलों की CBI जांच की मांग करते रहे हैं।

क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?

JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा है। छात्रों की प्रमुख मांगों में—

  • JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की मांग
  • JPSC-JSSC मामलों की स्वतंत्र/CBI जांच
  • कथित अनियमितताओं में शामिल लोगों पर कार्रवाई
  • भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार
  • विवादित परीक्षाओं को लेकर स्पष्ट और ठोस निर्णय

शामिल हैं।

छात्रों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन से उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। वे सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

वाटर कैनन और बैरिकेडिंग के बाद बढ़ा तनाव

विधानसभा मार्च को रोकने के लिए प्रशासन ने कई स्तरों पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था की थी। प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हुई और लाठीचार्ज की घटना सामने आई।

प्रदर्शनकारियों की ओर से बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश किए जाने की बात भी सामने आई है। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच टकराव की स्थिति बनी रही।

आंदोलन ने पकड़ा राजनीतिक रंग

JPSC-JSSC को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब राजनीतिक रूप से भी बड़ा मुद्दा बन चुका है। भाजपा समेत विपक्षी दल लगातार छात्रों की मांगों का समर्थन कर रहे हैं और सरकार से कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

वहीं, सरकार की ओर से छात्रों के विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत की जा रही है और कई मांगों पर सकारात्मक रुख के संकेत दिए गए हैं। हालांकि, परीक्षा रद्द करने और जांच की मांग जैसे मुद्दों पर अभी भी गतिरोध बना हुआ है।

लाठीचार्ज की घटना के बाद आंदोलन और तेज होने की संभावना है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इस घटनाक्रम के बाद छात्रों से संवाद के जरिए समाधान निकालती है या आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप लेता है।