पोटका प्रखंड मुख्यालय और आसपास के गांवों को पेयजल आपूर्ति के लिए करीब 30 वर्ष पूर्व बनाई गई 5 हजार गैलन क्षमता की जल मीनार अब खतरे का कारण बनती जा रही है। वर्षों से मरम्मत नहीं होने के कारण इसकी स्थिति काफी जर्जर हो चुकी है।स्थानीय लोगों के अनुसार जल मीनार के कई पिलर कमजोर हो चुके हैं और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्थिति को देखते हुए फिलहाल इसमें आधी क्षमता तक ही पानी भरा जा रहा है ताकि अतिरिक्त दबाव से कोई दुर्घटना न हो।इस जल मीनार से प्रखंड कार्यालय वहां कार्यरत कर्मियों और आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को पानी की आपूर्ति होती रही है लेकिन अब इसकी हालत बेहद चिंताजनक हो गई है।आदिवासी मूलवासी विकास परिषद के अध्यक्ष नीरूप हांसदा और सचिव उज्जवल मंडल ने कहा कि यह जल मीनार क्षेत्र के लिए जीवन रेखा है लेकिन प्रशासन की लापरवाही के कारण यह जर्जर हो चुकी है।उन्होंने प्रशासन से जल्द मरम्मत कराने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो स्थानीय लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे।