चतरा जिले के इटखोरी प्रखंड अंतर्गत कोनी पंचायत एक ऐसी विडंबना का उदाहरण बन गया है जहां प्राकृतिक जलधारा होने के बावजूद लोग पानी के लिए तरस रहे हैं।कोनी गांव के फुटबॉल मैदान के पास धरती को चीरकर निकलने वाली एक अविरल जलधारा सालों से लगातार बह रही है। ग्रामीण इसे मां गंगा का प्रवाहमानते हैं। बुजुर्गों के अनुसार यह जलधारा उनके बचपन से ही बिना रुके बहती आ रही है और इसका पानी मीठा व साफ है।लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसी पंचायत और आसपास के क्षेत्रों में भू जल स्तर लगातार गिर रहा है। चापाकल सूख चुके हैं कुएं जवाब दे चुके हैं और गर्मी के दिनों में पानी के लिए हाहाकार मच जाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस जलधारा पर चेकडैम जलाशय या पाइपलाइन की व्यवस्था कर दी जाए तो यह पूरे पंचायत के लिए जीवनरेखा बन सकती है। इससे पेयजल सिंचाई और पशुओं के लिए पानी की समस्या का स्थायी समाधान संभव है।ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है।हालांकि अब एक नई उम्मीद जगी है। उपायुक्त रवि आनंद की पहल पर जिले में 24 अप्रैल से 11 मई 2026 तक पेयजल समाधान विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के पहले चरण में कोनी पंचायत को शामिल किया गया है जहां 24 अप्रैल को इस समस्या पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा सकता है।प्रशासन का दावा है कि इस अभियान के दौरान हर पंचायत में मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया जाएगा।अब देखना होगा कि यह प्राकृतिक जलधारा सच में लोगों के लिए जीवनरेखा बन पाती है या फिर यूं ही बहकर बर्बाद होती रहेगी।