शिव की नगरी देवघर को परंपराओं का शहर कहा जाता है जहां कई ऐसी धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं निभाई जाती हैं जो केवल बाबा बैद्यनाथ धाम में ही देखने को मिलती हैं। दो दिन बाद आने वाली महाशिवरात्रि को लेकर मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।महाशिवरात्रि से ठीक दो दिन पहले बाबा बैद्यनाथ मंदिर और माता पार्वती मंदिर के मुख्य शिखर पर लगे पंचशूल को विधि-विधान के साथ उतारा गया। यह परंपरा हर वर्ष शिवरात्रि से पहले निभाई जाती है। पंचशूल को नीचे उतारने के साथ साथ बाबा और माता पार्वती का गठबंधन भी अस्थायी रूप से हटाया गया।पंचशूल उतरते ही श्रद्धालुओं में उसे स्पर्श करने की होड़ मच गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंचशूल को छूकर पुण्य लाभ अर्जित करते नजर आए। इसके बाद पंचशूल की विधिवत साफ सफाई कराई गई।मंदिर प्रबंधन के अनुसार शुक्रवार को विशेष पूजा अर्चना के बाद सभी मंदिरों के पंचशूलों की पूजा की जाएगी और पुनः उन्हें मंदिरों के शीर्ष पर स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही माता पार्वती और बाबा भोलेनाथ का पावन गठबंधन भी कराया जाएगा जिसे परंपरागत रूप से सरदार पांडा द्वारा संपन्न कराया जाता है।बताया जाता है कि बाबा बैद्यनाथ धाम विश्व का इकलौता मंदिर है जहां महाशिवरात्रि के दिन बाबा भोलेनाथ की चतुर पहर पूजा की जाती है और सिंदूर दान की अनूठी परंपरा निभाई जाती है। इन विशेष परंपराओं के कारण महाशिवरात्रि पर देश विदेश से लाखों श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं।