इतिहास में सबसे कमजोर प्रधानमंत्री गिने जाएंगे, सोनम वांगचुक मामले पर मनोज झा का PM मोदी पर हमला
पटना: सोनम वांगचुक और आंदोलनकारियों के मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आंदोलनकारियों के साथ सीधे संवाद स्थापित करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ऐसा नहीं होने पर इतिहास प्रधानमंत्री को कमजोर प्रधानमंत्री के रूप में याद कर सकता है। मीडिया से बातचीत के दौरान मनोज झा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर गौतम बुद्ध और भारत को 'मदर ऑफ डेमोक्रेसी' के रूप में उल्लेख करते हैं। ऐसे में लोकतंत्र की वास्तविक परीक्षा आंदोलनकारियों से संवाद करने और उनकी बात सुनने में है। उन्होंने प्रधानमंत्री से सीधे बातचीत कर आंदोलन से जुड़े मुद्दों का समाधान निकालने की अपील की। 'संवाद का रास्ता अख्तियार कीजिए' मनोज झा ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार को युवाओं और किसानों के संघर्ष तथा उनकी समस्याओं को समझना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक रणनीतियों और सत्ता के आंकड़ों के बीच सरकार युवाओं के आक्रोश और उनके मुद्दों की अनदेखी कर रही है। मनोज झा ने कहा, "आप संवाद का रास्ता अख्तियार कीजिए।" उन्होंने दावा किया कि यदि सरकार जन आंदोलनों और युवाओं की आवाज से दूरी बनाए रखती है तो इतिहास में उसके नेतृत्व का आकलन इसी आधार पर किया जाएगा। 'एक मंत्री के इस्तीफे से नहीं बनेगी बात' राजद सांसद ने कहा कि वह इस मुद्दे पर केवल एक सांसद या राजनीतिक दल के प्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि एक शिक्षक के तौर पर भी अपनी बात रख रहे हैं। छात्र राजनीति से अपने लंबे जुड़ाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे छात्र और युवा आंदोलनों की अहमियत को समझते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आंदोलन समय के साथ विकसित होते हैं और उनके मुद्दे भी व्यापक होते जाते हैं। मनोज झा के मुताबिक, आंदोलन से जुड़े युवाओं की ओर से अब यह बात सामने आ रही है कि केवल किसी एक मंत्री के इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय होनी चाहिए। सोनम वांगचुक के समर्थन में बोले मनोज झा सोनम वांगचुक की तबीयत खराब होने के बाद राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ने से जुड़े सवाल पर मनोज झा ने कहा कि वह इस बात से सहमत नहीं हैं कि इससे पहले पूरी तरह राजनीतिक चुप्पी थी। उन्होंने कहा कि हर आंदोलन का अपना स्वरूप और गति होती है तथा उसे जमीन पर मजबूत होने में समय लगता है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के साथ-साथ उसमें शामिल लोग भी समय के साथ अपने विचारों और रणनीति को विकसित करते हैं। अब वह समय आ गया है जब अब तक आंदोलन को बाहर से देख रहे लोग भी अपनी भूमिका पर पुनर्विचार कर रहे हैं। यही वजह है कि आंदोलन के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग सामने आ रहे हैं।















