330 करोड़ का चंदा, चुनाव में सिर्फ 1 उम्मीदवार: गुजरात की 6 राजनीतिक पार्टियों को लेकर बड़ा खुलासा
नई दिल्ली: राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। गुजरात में रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त छह राजनीतिक दलों को वित्त वर्ष 2022-23 में 1,500 करोड़ रुपये से अधिक का चंदा मिलने का दावा सामने आया है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन छह दलों को मिला कुल चंदा बीजेपी को छोड़कर बाकी राष्ट्रीय दलों को मिले संयुक्त चंदे से भी अधिक था। सबसे अहम बात यह है कि इतनी बड़ी रकम हासिल करने वाले इन दलों की चुनावी गतिविधियां बेहद सीमित रहीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में इन छह पार्टियों ने मिलकर सिर्फ 15 उम्मीदवार मैदान में उतारे। रिपोर्ट के अनुसार, इन छह राजनीतिक दलों में सत्यवादी रक्षक पार्टी, आम जनमत पार्टी, गरीब कल्याण पार्टी, स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी, भारतीय नेशनल जनता दल और न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी शामिल हैं। इन सभी दलों का पंजीकरण गुजरात में है। इनमें पांच पार्टियों के पते अहमदाबाद में, जबकि एक पार्टी का पंजीकृत पता आनंद में बताया गया है। वित्त वर्ष 2022-23 में आम जनमत पार्टी को करीब 620 करोड़ रुपये, सत्यवादी रक्षक पार्टी को करीब 330 करोड़ रुपये, न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी को लगभग 200 करोड़ रुपये और गरीब कल्याण पार्टी को करीब 138 करोड़ रुपये चंदा मिलने की बात रिपोर्ट में कही गई है। बाकी दो दलों को भी बड़ी रकम मिलने का दावा किया गया है। इन छह दलों में सत्यवादी रक्षक पार्टी का मामला खास तौर पर चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी को एक वित्त वर्ष में मिलने वाला चंदा बढ़कर करीब 330 करोड़ रुपये हो गया। इसके बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने सिर्फ एक उम्मीदवार को मैदान में उतारा। पार्टी की ओर से चुनाव प्रचार पर करीब 8 करोड़ रुपये खर्च करने की जानकारी दी गई है। वहीं, पार्टी ने करीब 316 करोड़ रुपये सामाजिक कार्य या चैरिटी पर खर्च किए जाने का दावा किया। इतनी बड़ी रकम और सीमित चुनावी गतिविधियों के बीच अंतर ने राजनीतिक चंदे के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए हैं। बीबीसी की पड़ताल में इन राजनीतिक दलों के आधिकारिक पतों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई पते आवासीय फ्लैटों या व्यावसायिक परिसरों में दर्ज थे, जबकि कुछ स्थानों पर कार्यालय बंद मिले। हालांकि, रिपोर्ट में ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है कि इन राजनीतिक दलों को मिला चंदा अपने आप में गैरकानूनी था। मौजूदा नियमों के तहत पंजीकृत राजनीतिक दल चंदा प्राप्त कर सकते हैं और निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर दानदाताओं को टैक्स में छूट भी मिल सकती है। बीबीसी की जांच में कुछ ऐसे मामलों का भी उल्लेख किया गया है, जिनकी आयकर विभाग ने जांच की थी। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दानदाताओं से टैक्स की राशि भी वसूली गई। रिपोर्ट में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के हवाले से एक संभावित तौर-तरीके का भी जिक्र है। इसमें बताया गया कि कोई व्यक्ति राजनीतिक दल को दान देकर टैक्स छूट का प्रमाण हासिल कर सकता है और कथित तौर पर बाद में दान की रकम का एक हिस्सा वापस प्राप्त कर सकता है। इसमें सेवा शुल्क या अन्य कटौती किए जाने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इस तरह की व्यवस्था को लेकर किसी भी विशिष्ट दल या व्यक्ति पर निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड को देखना जरूरी है। चुनाव आयोग के पास देश में करीब 2,800 पंजीकृत राजनीतिक दल हैं। हालांकि, इनमें से केवल सीमित संख्या को राष्ट्रीय या राज्य स्तर की मान्यता प्राप्त है। देश के छह राष्ट्रीय दलों में बीजेपी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, सीपीआई(एम) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) शामिल हैं। पंजीकृत राजनीतिक दलों के लिए अपने खातों का ऑडिट कराना और निर्धारित नियमों के तहत चुनाव आयोग के समक्ष वार्षिक रिपोर्ट दाखिल करना जरूरी होता है। साथ ही, 20 हजार रुपये से अधिक के योगदान से जुड़े दानदाताओं का विवरण भी निर्धारित नियमों के अनुसार प्रस्तुत करना होता है। चुनाव आयोग पहले भी ऐसे कई गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है, जिन्होंने लंबे समय तक चुनाव नहीं लड़ा या कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा। ऐसे में गुजरात की इन छह पार्टियों को वित्त वर्ष 2022-23 में मिले 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के चंदे और उनकी अपेक्षाकृत सीमित चुनावी गतिविधियों के बीच का अंतर कई सवाल जरूर खड़े करता है। हालांकि, यह भी स्पष्ट नहीं है कि 2022-23 के बाद इन दलों को इसी स्तर पर चंदा मिलता रहा या नहीं।किन छह पार्टियों को मिला भारी चंदा?
330 करोड़ रुपये पाने वाली पार्टी ने उतारा सिर्फ एक उम्मीदवार
पार्टी कार्यालयों पर भी नहीं दिखी बड़ी राजनीतिक गतिविधि
टैक्स छूट और चंदे के इस्तेमाल पर उठे सवाल
देश में करीब 2,800 पंजीकृत राजनीतिक दल
सीमित चुनावी गतिविधियों के बीच करोड़ों के चंदे पर सवाल














