पुरुलिया : पश्चिम बंगाल के पुरुलिया स्थित कड़ाडीह में 20 सितंबर को होने वाला करम पर्व महाजुटान इस वक्त कुड़मी समाज के बीच चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। कड़ाडीह मैदान में होने वाले इस आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां चल रही हैं। झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम समेत अलग-अलग क्षेत्रों से कुड़मी समाज के लोगों, सामाजिक प्रतिनिधियों और करम दलों के शामिल होने की बात कही जा रही है।

करम पर्व की सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े इस आयोजन को आयोजक महज एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की एकजुटता, सामाजिक पहचान और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सामूहिक मंथन के मंच के रूप में देख रहे हैं।

खास बात यह है कि 20 सितंबर की तारीख को पिछले आंदोलनों और कुड़मी समाज की आगे की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

ऐसे में बड़ा सवाल है 20 सितंबर के इस महाजुटान का असली संदेश क्या होगा क्या यह आयोजन सिर्फ समाज को एकजुट करने तक सीमित रहेगा या इसके मंच से सरकार और राजनीतिक दलों को भी कोई बड़ा संदेश दिया जाएगा

रेल-टेका आंदोलन के बाद कुड़मी समाज की रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ रही है? बंगाल की राजनीति के बाद झारखंड में कुड़मी समाज का राजनीतिक रुख क्या होगा इन्हीं तमाम सवालों पर आज हमारे साथ हैं कुड़मी समाज के प्रमुख नेता अजीत प्रसाद महतो, जिनसे इन सभी मुद्दों पर होगी सीधी और बेबाक बातचीत।