केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नई त्रि-भाषा नीति (Three-Language Policy) को लेकर संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कक्षा 7 से 9 और 10 में अध्ययनरत छात्रों पर नई भाषा नीति लागू नहीं होगी। इससे मौजूदा 10वीं के छात्रों को बड़ी राहत मिली है।

मौजूदा छात्रों को नहीं देना होगा तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा

CBSE के अनुसार  वर्तमान में कक्षा 6  7 और 9 में पढ़ रहे छात्र जब भविष्य में 10वीं कक्षा में पहुंचेंगे तब उन्हें तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी। इसी तरह वर्तमान कक्षा 7 से 9 और 10 के विद्यार्थियों को नई भाषा व्यवस्था के तहत किसी अतिरिक्त परीक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे छात्रों के लिए भी राहत

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हुई हैं  वे उन्हें जारी रख सकेंगे। हालांकि  ऐसे छात्रों को एक अतिरिक्त भारतीय भाषा का अध्ययन करना होगा  ताकि नई भाषा नीति की मूल भावना का पालन किया जा सके।

क्या कहती है संशोधित त्रिभाषा नीति?

संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार—

  • प्रत्येक छात्र को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा।
  • इनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य होगा।
  • भारतीय भाषाओं में हिंदी  संस्कृत  तमिल  तेलुगु  कन्नड़  बंगाली  मराठी  गुजराती  पंजाबी मलयालम  उड़िया  असमिया सहित अन्य मान्यता प्राप्त भारतीय भाषाएं शामिल हैं।
  • विदेशी भाषाएं पढ़ने की अनुमति रहेगी  लेकिन भारतीय भाषाओं की अनिवार्यता बनी रहेगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बदलाव

CBSE का यह संशोधन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप किया गया है। बोर्ड का उद्देश्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और छात्रों में बहुभाषी क्षमता विकसित करना है। साथ ही  वर्तमान छात्रों को अचानक बदलाव से होने वाली परेशानी से बचाने के लिए उन्हें इस नई व्यवस्था से छूट दी गई है।