रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पर्यावरण संरक्षण को शहरी विकास से जोड़ते हुए कहा कि शहरों के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को शहरी क्षेत्रों में पौधरोपण बढ़ाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने ‘पेड़ लगाओ, फ्री बिजली पाओ’ योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा, ताकि अधिक से अधिक लोग पौधरोपण अभियान से जुड़ सकें। इसके साथ ही शहरों में हरित आवरण बढ़ाने, प्रदूषण कम करने और नागरिकों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्थित शहरी पौधरोपण अभियान चलाने पर जोर दिया गया।

लंबित वन पट्टा मामलों के निष्पादन के निर्देश

बैठक में मुख्यमंत्री ने वन पट्टा से जुड़े लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र लाभुकों को बिना अनावश्यक देरी के वन पट्टा उपलब्ध कराया जाए।

इसके अलावा वन विकास, पर्यावरण संरक्षण और विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। योजनाओं की नियमित निगरानी और स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

काजू और बांस की व्यावसायिक खेती पर फोकस

मुख्यमंत्री ने राज्य में काजू और बांस सहित विभिन्न व्यावसायिक फसलों की खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। अधिकारियों से बड़े भू-भागों की पहचान कर वहां व्यापक स्तर पर काजू और बांस के पौधे लगाने की संभावनाओं पर काम करने को कहा गया है।

सरकार का उद्देश्य राज्य में काजू उत्पादन की संभावनाओं को विकसित कर किसानों और ग्रामीणों के लिए आय के नए स्रोत तैयार करना है। वहीं, बांस के व्यापक रोपण और उसके सुनियोजित विकास पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई।

बांस आधारित उद्योगों से रोजगार की संभावना

मुख्यमंत्री ने कहा कि बांस आधारित उद्योगों और बैम्बू क्राफ्ट को बढ़ावा देकर राज्य में स्वरोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ पारंपरिक हस्तशिल्प को भी नया बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है।

शहरी क्षेत्रों में पर्यावरणीय संतुलन मजबूत करने के उद्देश्य से छायादार और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल पेड़-पौधों के बड़े पैमाने पर रोपण के निर्देश भी दिए गए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में पौधरोपण और हरित क्षेत्र बढ़ाने का उद्देश्य केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे ग्रामीण समृद्धि, रोजगार सृजन और सतत विकास से भी जोड़ा जाना चाहिए। इसके लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल और आर्थिक रूप से लाभकारी पौधों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है।