हजारीबाग: शहर में सरकारी खास महल जमीन को लेकर विवाद एक बार फिर सामने आया है। मौजा कैंटोनमेंट स्थित होल्डिंग संख्या 302 की करीब 50 डिसमिल जमीन पर कथित अतिक्रमण को लेकर प्रशासन की कार्रवाई के कुछ दिनों बाद दोबारा घेराबंदी और निर्माण कार्य शुरू होने का दावा किया जा रहा है।

मामले में कांग्रेस के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव का नाम सामने आ रहा है। हालांकि, निर्माण कार्य और दोबारा घेराबंदी में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनके घर के समीप विवादित जमीन पर फिर से बांस, झाड़ियों और हरे कपड़े से घेराबंदी की गई है और इसके भीतर निर्माण कार्य कराया जा रहा है।

3 अगस्त को प्रशासन ने की थी कार्रवाई

बताया जाता है कि 3 अगस्त को सदर सीओ आशुतोष कुमार के नेतृत्व में जिला प्रशासन की टीम ने विवादित स्थल पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। कार्रवाई के दौरान बांस, झाड़ियों और हरे कपड़े से की गई घेराबंदी को हटाया गया था।

मौके पर रखी निर्माण सामग्री, जिसमें बालू, छर्री और गिट्टी शामिल थी, को भी प्रशासन की ओर से हटवाए जाने की बात सामने आई थी। इसके लिए नगर पालिका के वाहनों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई।

कार्रवाई के बाद फिर घेराबंदी का दावा

अब स्थानीय लोगों की ओर से दावा किया जा रहा है कि प्रशासन की कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद विवादित स्थल पर दोबारा बांस और झाड़ियों के सहारे घेराबंदी कर दी गई है। हरे कपड़े से पूरे हिस्से को ढकने की वजह से अंदर चल रही गतिविधियां सड़क से दिखाई नहीं देने का आरोप लगाया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन पर दोबारा निर्माण सामग्री पहुंचाई गई है और मजदूरों के जरिए काम कराया जा रहा है। यदि यह दावा सही है तो यह प्रशासन की पूर्व कार्रवाई के बावजूद दोबारा निर्माण किए जाने का मामला होगा।

पूर्व मंत्री की भूमिका को लेकर उठ रहे सवाल

पूरे मामले को लेकर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उनके द्वारा दोबारा निर्माण शुरू कराने या प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती देने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि विवादित जमीन पर वर्तमान में निर्माण किसके निर्देश पर कराया जा रहा है और जमीन पर किसी प्रकार के निर्माण की वैध अनुमति मौजूद है या नहीं।

FIR और सरकारी रिकॉर्ड का भी हवाला

स्थानीय स्तर पर इस जमीन से जुड़े मामले में बड़ा बाजार थाना कांड संख्या 289/2023 और 489/2023 का भी उल्लेख किया जा रहा है। साथ ही दावा है कि जमीन से संबंधित अभिलेख आयुक्त स्तर से राज्य सरकार को रिज्यूम करने के लिए भेजे जा चुके हैं।

इन दावों और दस्तावेजों की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर

एक तरफ प्रशासन पहले ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर चुका है, वहीं दूसरी तरफ उसी स्थान पर दोबारा घेराबंदी और निर्माण शुरू होने के दावे ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।