पोस्टमार्टम एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसका नाम सुनते ही मन विचलित हो जाता है। इसमें शव के हर हिस्से की बारीकी से जांच की जाती है ताकि मौत के कारणों का पता लगाया जा सके। यही वजह है कि आमतौर पर लोग चाहते हैं कि उनके परिजन का पोस्टमार्टम न हो। 

लेकिन जब किसी मामले की तह तक पहुंचना होता है, तो पोस्टमार्टम ही सच सामने लाने का माध्यम बनता है। कुछ ऐसा ही दृश्य आज झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) कार्यालय में देखने को मिला, जहां सीआईडी की टीम 14वीं जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए पहुंची।

 सवाल यह है कि क्या यह जांच पूरे मामले का निष्पक्ष "पोस्टमार्टम" करेगी या फिर पहले की तरह कई सवाल अनुत्तरित रह जाएंगे? करीब दो वर्ष पहले झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सीजीएल परीक्षा भी विवादों में रही थी।

 पहले पेपर लीक के आरोप लगे, परीक्षा रद्द हुई, दोबारा परीक्षा कराई गई और फिर से पेपर लीक तथा नेपाल में अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र रटवाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए। उस मामले की जांच भी सीआईडी को सौंपी गई थी।

 बाद में जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने अपना निर्णय दिया। अब 14वीं जेपीएससी परीक्षा को लेकर भी आरोपों की जांच सीआईडी कर रही है। ऐसे में अभ्यर्थियों और आम लोगों की नजर इस जांच पर टिकी है।

 सभी की अपेक्षा है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित हो, ताकि यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसका सच सामने आए और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो।

 वहीं यदि आरोप निराधार हों, तो यह भी स्पष्ट हो सके। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सीआईडी की जांच इस विवाद के सभी पहलुओं पर क्या निष्कर्ष निकालती है। इसका जवाब जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मिलेगा।