प्रखंड मुख्यालय रमना निवासी आनंद ठाकुर के 20 वर्षीय पुत्र शुभम कुमार ने कम उम्र में ऐसा निर्णय लिया है जो आज के भौतिकवादी युग में विरले ही देखने को मिलता है। उज्ज्वल भविष्य और उच्च वेतन वाली मर्चेंट नेवी की नौकरी को त्याग कर शुभम ने अध्यात्म का मार्ग चुन लिया है। वे पिछले एक वर्ष से वृंदावन में रहकर साधना सेवा और संयमपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे हैं।जानकारी के अनुसार शुभम दिल्ली में पढ़ाई कर रहे थे। पढ़ाई के दौरान वे अक्सर वृंदावन जाया करते थे। इन यात्राओं के दौरान वहां की आध्यात्मिक चेतना संतों का सान्निध्य और भक्ति वातावरण ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। धीरे धीरे उनका मन सांसारिक उपलब्धियों से हटकर आत्मिक शांति और ईश्वर भक्ति की ओर आकर्षित होता चला गया।इसी क्रम में शुभम ने वृंदावन में स्वामी प्रेमानंद महाराज की शरण ग्रहण की। उनके अनुशासन सेवा भाव और साधना से प्रभावित होकर महाराज ने शुभम को पीला वस्त्र धारण कराकर विधिवत अपना शिष्य स्वीकार किया। गुरु दीक्षा के साथ ही शुभम ने गृहस्थ जीवन की सभी आकांक्षाओं को त्याग कर पूर्ण रूप से आध्यात्मिक जीवन अपना लिया।बताया जा रहा है कि शुभम कुमार न केवल रमना प्रखंड बल्कि पूरे गढ़वा जिले के पहले ऐसे युवा हैं जिन्होंने आधुनिक शिक्षा महानगरीय जीवन और उच्च वेतन वाली नौकरी को छोड़कर सनातन गुरु शिष्य परंपरा में दीक्षित होकर अध्यात्म का मार्ग अपनाया है।उनके इस निर्णय से रमना सहित आसपास के क्षेत्रों में व्यापक चर्चा हो रही है। युवाओं के बीच इसे आत्ममंथन और जीवन के उद्देश्य पर विचार करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। समाज के प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि शुभम का त्याग यह संदेश देता है कि जीवन केवल धन और पद तक सीमित नहीं है बल्कि सेवा, साधना और आत्मिक शांति भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।परिजनों के अनुसार शुरुआत में यह निर्णय भावनात्मक रूप से कठिन था लेकिन अब वे शुभम के संकल्प संतुलन और आध्यात्मिक दृढ़ता पर गर्व महसूस कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि शुभम कुमार का यह कदम आने वाली पीढ़ियों को संयम श्रद्धा और सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित करेगा।