नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले को देर से उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि यदि सरकार पहले निर्णय लेती, तो हाल के घटनाक्रमों से बचा जा सकता था।

कांग्रेस का पहला बयान

कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया कि "नरेंद्र मोदी भारत का अतीत हैं। अतीत कभी भविष्य से नहीं लड़ सकता।" पार्टी ने इसे छात्रों की आवाज और लोकतांत्रिक दबाव का परिणाम बताया।

पवन खेड़ा बोले- "देर से उठाया गया अधूरा कदम"

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा काफी देर से लिया गया फैसला है।

उन्होंने कहा कि यह "देर से उठाया गया अधूरा कदम" है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम बताया।

खड़गे ने बताया युवाओं और सत्य की जीत

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छात्रों की आवाज आखिरकार सत्ता तक पहुंच गई।

उन्होंने लिखा कि यह "युवाओं और सत्य की जीत तथा अहंकार की हार" है। साथ ही उन्होंने सरकार से छात्रों के प्रति जवाबदेही तय करने और हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

अधीर रंजन चौधरी ने सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यदि सरकार पहले ही निर्णय ले लेती तो हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई कई घटनाओं से बचा जा सकता था।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बढ़ते राजनीतिक दबाव के बाद यह फैसला लिया और कहा कि यह निर्णय परिस्थितियों की वजह से लेना पड़ा।

धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?

इस्तीफा सौंपते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि हाल के घटनाक्रमों ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से विचलित किया है। उन्होंने कहा कि यह मामला उनके लिए "व्यक्तिगत प्रतिष्ठा" का विषय नहीं है और उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना पद छोड़ने का निर्णय लिया।

आगे क्या?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी परीक्षा प्रणाली, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की मांगों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। विपक्ष लगातार सरकार से आगे की कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और आगे की रणनीति पर नजर बनी हुई है।