ढाका: बांग्लादेश में प्रस्तावित 81 फीट ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा के निर्माण से जुड़े हरिदास चंद्र तरनी दास को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। बांग्लादेश पुलिस ने रविवार देर रात गाइबांधा जिले से उन्हें हिरासत में लिया, जिसके बाद अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।
पुलिस के अनुसार, हरिदास चंद्र तरनी दास पर करीब 9.35 करोड़ टका के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि उनके बैंक खातों और मोबाइल फाइनेंशियल सर्विस (MFS) खातों में बड़े पैमाने पर संदिग्ध लेनदेन मिले हैं, जबकि आय का कोई वैध स्रोत सामने नहीं आया है।
CID का दावा
बांग्लादेश की सीआईडी ने बताया कि संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के आधार पर उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। शुरुआती जांच में स्थानीय और विदेशी मुद्रा के कथित लेनदेन तथा संगठित अपराध से संभावित संबंधों की भी जांच की जा रही है।
कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि हरिदास ने वर्ष 2019 में इस्लाम धर्म अपनाकर अपना नाम तौहीद इस्लाम रखा था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अदालत में क्या बोले हरिदास?
अदालत में पेशी के दौरान हरिदास ने अपने ऊपर लगे आरोपों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान को ही जांच के दायरे में लाया गया है।
उन्होंने अदालत से कहा कि यदि मंदिर का संचालन करना अपराध माना जा रहा है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही उन्होंने जांच एजेंसियों से अपील की कि दान की राशि का निष्पक्ष तरीके से सत्यापन किया जाए और यह देखा जाए कि उसका उपयोग किसी गैरकानूनी गतिविधि में हुआ है या नहीं।
प्रतिमा परियोजना को लेकर पहले भी रहा विवाद
हरिदास चंद्र तरनी दास उस समय चर्चा में आए थे, जब गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी स्थित श्री श्री राधा गोविंद काली मंदिर परिसर में 81 फीट ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा स्थापित करने की योजना सामने आई थी। इस प्रस्ताव को लेकर हाल के दिनों में बांग्लादेश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस और विवाद भी देखने को मिला था।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस वित्तीय लेनदेन से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।














