नई दिल्ली: नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ से भारी तबाही के बीच भारत ने पड़ोसी देश की मदद के लिए तेजी दिखाई है। बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल को 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी, जिसमें जरूरी दवाइयां और राहत कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री शामिल है। पहली खेप काठमांडू पहुंच चुकी है।

भारत की इस त्वरित सहायता को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा हो रही है। लोग भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और संकट के समय पड़ोसी देशों की मदद करने की प्रतिबद्धता की सराहना कर रहे हैं।

जयशंकर ने दी मदद की जानकारी

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार रात करीब 9:19 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नेपाल में बाढ़ से हुए नुकसान को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में नेपाल और वहां के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है।

नेपाल के रसुवा और आसपास के इलाकों में अचानक आई बाढ़ से जान-माल का नुकसान हुआ है। इसके बाद भारत ने राहत एवं बचाव अभियान में सहयोग के लिए मानवीय सहायता भेजने का फैसला किया।

करीब दो घंटे में काठमांडू पहुंची राहत सामग्री

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत की ओर से भेजी गई 10 टन मानवीय सहायता नेपाल पहुंच गई है। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने यह राहत सामग्री संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल को सौंपी।

राहत सामग्री का इस्तेमाल बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत और बचाव कार्यों में किया जाएगा। जयशंकर के सहायता से जुड़े पोस्ट के कुछ ही घंटों बाद राहत सामग्री काठमांडू पहुंच गई, जिसे भारत की तेज प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

पीएम मोदी ने बालेन शाह से की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बातचीत की। पीएम मोदी ने बाढ़ के कारण हुई जान-माल की क्षति पर दुख जताया और नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया।

पीएम मोदी ने कहा कि इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल के अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की टीमें नेपाल में राहत और बचाव कार्यों के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय कर रही हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जताई संवेदना

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी नेपाल में अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही पर दुख जताया। उन्होंने नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और नेपाल की जनता के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में नेपाल के साथ एकजुट है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत आपदा से प्रभावित लोगों के लिए नेपाल सरकार के राहत और बचाव प्रयासों में सहायता देने के लिए तैयार है।

राहत मिशन के लिए IAF के विमान भी तैयार

नेपाल में संभावित राहत एवं बचाव अभियान को देखते हुए भारतीय वायु सेना ने अपने परिवहन विमानों को भी स्टैंडबाय पर रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें C-17, C-130J और C-295 जैसे परिवहन विमान शामिल हैं।

जरूरत पड़ने पर इन विमानों के जरिए राहत सामग्री, उपकरण और अन्य जरूरी संसाधनों को नेपाल पहुंचाया जा सकता है।

पड़ोसी देशों की मदद में आगे रहा है भारत

भारत अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और संकट के समय सहायता को प्राथमिकता देता रहा है। प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकटों के दौरान भारत ने नेपाल के अलावा भूटान, श्रीलंका, मालदीव और म्यांमार समेत कई देशों को सहायता उपलब्ध कराई है।

भारत की मानवीय सहायता में खाद्य सामग्री, दवाइयां, राहत उपकरण, बचाव दल और जरूरत के अनुसार वित्तीय सहायता शामिल रही है। भूकंप, बाढ़ और अन्य आपदाओं के दौरान भारत ने कई मौकों पर तत्काल राहत अभियान चलाए हैं।

ऑपरेशन दोस्त और ऑपरेशन मैत्री के जरिए भी पहुंचाई मदद

आपदा के समय भारत ने राहत एवं बचाव अभियानों के लिए 'ऑपरेशन दोस्त' और 'ऑपरेशन मैत्री' जैसे अभियानों का भी संचालन किया है। इन अभियानों के जरिए भारत ने प्रभावित देशों में राहत सामग्री, मेडिकल टीम और अन्य जरूरी संसाधन पहुंचाए हैं।

भारत की विदेश नीति में मानवीय सहायता को 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना से भी जोड़ा जाता है। इसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है और संकट के समय मानवता के आधार पर एक-दूसरे की मदद की जानी चाहिए।

पाकिस्तान को भी मदद का ऑफर दे चुका है भारत

भारत ने अतीत में पाकिस्तान समेत अन्य पड़ोसी देशों को भी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता की पेशकश की है। वर्ष 2010 में पाकिस्तान में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान भारत की ओर से राहत सहायता की पेशकश किए जाने का उल्लेख भी मिलता है।

भारत का कहना है कि मानवीय संकट के समय सहायता का उद्देश्य प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना है, चाहे वह किसी भी देश के नागरिक हों।

सोशल मीडिया पर भारत की मदद की तारीफ

नेपाल को भारत की ओर से तेजी से सहायता पहुंचाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई यूजर्स ने भारत की मदद को पड़ोसी धर्म और मानवीय एकजुटता का उदाहरण बताया।

नेपाल में बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए राहत अभियान जारी है। ऐसे में भारत की ओर से भेजी गई 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री से राहत एवं बचाव कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।