नई दिल्ली : पाकिस्तान की ओर से जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को भगोड़ा घोषित करने और उसके सिर पर इनाम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये करने के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं। जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने इसे पाकिस्तान की ओर से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की कोशिश बताया है।

एसपी वैद के मुताबिक, पाकिस्तान का यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब Financial Action Task Force (FATF) की बैठक प्रस्तावित है। उनका दावा है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई दिखाकर अंतरराष्ट्रीय निगरानी और संभावित कार्रवाई से बचने की कोशिश कर रहा है।

‘सिर्फ कागजों पर कार्रवाई’

न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में एसपी वैद ने कहा कि पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित किया है, लेकिन यह वास्तविक कार्रवाई के बजाय अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है।

उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान का उद्देश्य FATF समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सामने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का संदेश देना है, ताकि उस पर किसी तरह की कड़ी कार्रवाई न हो।

हालांकि, पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया इस खबर के आधार पर सामने नहीं आई है।

FIA की नई रेड बुक में मसूद अजहर का नाम

पाकिस्तान की Federal Investigation Agency (FIA) ने अपनी नई रेड बुक में मसूद अजहर को भगोड़ा घोषित किया है। इसके साथ ही उसके सिर पर घोषित इनाम को बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये किया गया है।

पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि मसूद अजहर उसके देश में नहीं है और वह अफगानिस्तान चला गया है। वर्ष 2021 में भी FIA की ओर से उसके खिलाफ इनाम घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

वहीं, भारतीय खुफिया एजेंसियों से जुड़े दावों के मुताबिक मसूद अजहर पाकिस्तान में ही छिपा हो सकता है। कुछ रिपोर्टों में उसके सिंध प्रांत के नवाबशाह इलाके में होने का दावा किया गया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

रेड बुक में 26/11 से जुड़े आतंकियों के नाम भी

FIA की नई रेड बुक में 26/11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े कई आरोपियों के नाम भी शामिल किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सूची में ऐसे लोगों के नाम हैं जिन पर हमलावरों को समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचाने, आर्थिक मदद देने या पूरे अभियान के प्रबंधन में सहयोग करने के आरोप हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, सूची में शामिल कई लोगों के साथ उनकी तस्वीर और कथित भूमिका का विवरण दिया गया है। हालांकि, कुछ नामों के मामले में पहले की सूची की तुलना में तस्वीर और अन्य जानकारियों में बदलाव किए जाने की बात सामने आई है।

रेड बुक में 1,804 मोस्ट वांटेड नाम

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की FIA रेड बुक में शामिल मोस्ट वांटेड लोगों की संख्या भी पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। वर्ष 2021 में यह संख्या करीब 1,330 बताई गई थी, जो अब बढ़कर लगभग 1,804 हो गई है।

इस बढ़ोतरी के बीच पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद से जुड़े लोगों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

FATF के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है मामला?

पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय निगरानी के दायरे में रहा है। ऐसे में किसी प्रमुख आतंकी संगठन के नेता को भगोड़ा घोषित करना और उसके खिलाफ इनाम की घोषणा करना अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा सकता है।

हालांकि, किसी व्यक्ति को रेड बुक में शामिल करना या उस पर इनाम घोषित करना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसके खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई हो चुकी है। अब इस मामले में पाकिस्तान की वास्तविक कार्रवाई और संबंधित जांच एजेंसियों के अगले कदम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।

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