राजनगर: सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड में खाद्यान्न आपूर्ति की DSD व्यवस्था को लेकर राशन डीलरों में भारी नाराजगी सामने आई है। करीब 50 राशन डीलरों ने एकजुट होकर गोदाम परिसर में व्यवस्था के खिलाफ विरोध जताया। डीलरों ने DSD संचालक की कार्यशैली, खाद्यान्न आपूर्ति में देरी और एक बाहरी व्यक्ति की कथित भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।डीलरों के अनुसार, राजनगर प्रखंड के लिए अधिकृत DSD संचालक रतन मिश्रा हैं। आरोप है कि उनके द्वारा मनोज महतो नामक व्यक्ति को अनधिकृत रूप से काम पर लगाया गया है और वही कथित तौर पर DSD की पूरी व्यवस्था संभाल रहे हैं। डीलरों का आरोप है कि मनोज महतो द्वारा उनके साथ कथित रूप से दबंगई और अभद्र व्यवहार किया जाता है।

राशन डीलर से कथित अभद्र व्यवहार का आरोप

मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब नेटो तिरिल गांव की मां सरस्वती महिला समिति की राशन डीलर पूर्णिमा महतो के साथ कथित अभद्र व्यवहार का आरोप सामने आया। डीलरों का दावा है कि बातचीत के दौरान उन्हें अपहरण जैसी धमकी दिए जाने की बात कही गई। घटना के बाद राशन डीलरों का आक्रोश और बढ़ गया।

तीन गाड़ियों के भरोसे खाद्यान्न आपूर्ति का आरोप

डीलरों का कहना है कि राजनगर जैसे बड़े प्रखंड में वर्तमान में महज तीन वाहनों के जरिए खाद्यान्न की आपूर्ति की जा रही है। आरोप है कि इनमें से एक वाहन की फिटनेस भी समाप्त हो चुकी है।डीलरों के मुताबिक वाहनों की कमी और व्यवस्था में कथित लापरवाही के कारण समय पर राशन नहीं पहुंच पा रहा है। उनका दावा है कि जिले के अन्य प्रखंडों में खाद्यान्न आपूर्ति करीब 99 से 100 प्रतिशत तक हो चुकी है, जबकि राजनगर में यह आंकड़ा अभी करीब 45 से 50 प्रतिशत ही है। हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि विभाग की ओर से नहीं हुई है।

वाहन नहीं मिलने पर खुद भाड़े पर गाड़ी लगाने का आरोप

राशन डीलरों ने आरोप लगाया कि कई बार DSD की ओर से समय पर वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाता। ऐसे में उन्हें मजबूरी में भाड़े पर वाहन लेकर खुद गोदाम से राशन उठाना पड़ता है और अपने क्षेत्र में वितरण करना पड़ता है।डीलरों का कहना है कि इससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी स्थिति के कारण वे आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हैं।

मनोज महतो को हटाने और जांच की मांग

विरोध कर रहे राशन डीलरों ने मांग की है कि मनोज महतो को DSD व्यवस्था से तत्काल हटाया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।डीलरों का कहना है कि खाद्यान्न वितरण जैसी महत्वपूर्ण सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता, समयबद्ध आपूर्ति और डीलरों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि शिकायतों का समाधान नहीं होने पर वे आगे भी विरोध जारी रखने को मजबूर होंगे।

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