झारखंड में 5 लाख हेक्टेयर राइस फॉलो क्षेत्र में दलहन-तिलहन की तैयारी, कृषि मंत्री ने मांगा विशेष पैकेज
नई दिल्ली: झारखंड में धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले राइस फॉलो क्षेत्र को दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों के दायरे में लाने की तैयारी है। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026 में केंद्र सरकार के सामने इस संबंध में विशेष वित्तीय और तकनीकी पैकेज की मांग रखी। 28 और 29 सितंबर को नई दिल्ली के पूसा स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में आयोजित सम्मेलन में मंत्री ने बताया कि झारखंड में रबी मौसम के दौरान करीब 12 लाख हेक्टेयर राइस फॉलो क्षेत्र उपलब्ध है। इसमें से करीब 5 से 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों के तहत लाने की क्षमता है। आगामी रबी सीजन में ही 50 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को खेती के दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा गया है। सम्मेलन में झारखंड में दलहन के क्षेत्र विस्तार का मुद्दा भी रखा गया। मंत्री के अनुसार, खरीफ 2025-26 में दलहन का क्षेत्र करीब 2.80 लाख हेक्टेयर था, जो खरीफ 2026-27 में बढ़कर करीब 3.73 लाख हेक्टेयर हो गया। इस तरह एक साल में दलहन के रकबे में करीब 93 हजार हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई। देवघर और दुमका में करीब 1,000-1,000 हेक्टेयर के अरहर क्लस्टर विकसित किए गए हैं। मंत्री ने क्लस्टर आधारित खेती को राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार देने की जरूरत बताई। झारखंड के पुराने भूमि अभिलेखों को लेकर भी सम्मेलन में राज्य की समस्या रखी गई। मंत्री ने कहा कि राज्य में अंतिम व्यापक भूमि सर्वेक्षण 1932 में हुआ था। पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा जमीनी स्थिति में अंतर के कारण AgriStack के तहत Farmer ID बनाने में व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने केंद्र से झारखंड के लिए Farmer ID निर्माण में विशेष लचीलापन देने की मांग की। साथ ही बड़े पैमाने पर Farmer ID बनने तक इसे PM-KISAN समेत जरूरी किसान कल्याण योजनाओं का अनिवार्य आधार नहीं बनाने का आग्रह किया। मंत्री ने किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC की कवरेज बढ़ाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बैंकों के माध्यम से पात्र किसानों की पहचान कर उन्हें KCC से जोड़ने के लिए समयबद्ध saturation drive चलाने की मांग की, ताकि किसानों की संस्थागत कृषि ऋण तक पहुंच बढ़ाई जा सके। छोटे, सीमांत और आदिवासी किसानों को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने कृषि यंत्रीकरण के लिए केंद्र से विशेष सहायता की मांग रखी। उन्होंने SMAM के तहत कृषि यंत्रों पर पात्र इकाई लागत के 90 प्रतिशत तक सब्सिडी देने पर विचार करने का आग्रह किया। शिल्पी नेहा तिर्की ने रांची के पलांडू स्थित फार्म रिसर्च सेंटर को ‘National Institute for Horticulture and Tribal Farming Research’ के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा। इसके लिए आधारभूत संरचना, शोध सुविधाओं और आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की गई। मंत्री ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को झारखंड आने का निमंत्रण दिया। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान ने 28 सितंबर को राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026 में राज्यों के साथ रबी सीजन की तैयारियों और केंद्र-राज्य समन्वय पर जोर दिया। शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड की कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय किसान आय, फसल विविधीकरण, तकनीक, प्रसंस्करण, बाजार और स्थानीय संसाधनों से जोड़कर व्यापक कृषि अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करने की जरूरत है।एक साल में 93 हजार हेक्टेयर बढ़ा दलहन का रकबा
1932 के भूमि रिकॉर्ड से Farmer ID में दिक्कत
KCC कवरेज बढ़ाने के लिए saturation drive की मांग
कृषि यंत्रों पर 90% तक सब्सिडी की मांग
पलांडू में राष्ट्रीय शोध संस्थान बनाने का प्रस्ताव
केंद्रीय कृषि मंत्री को झारखंड आने का निमंत्रण














